जम्मू, 9 जुलाई (आईएएनएस)। कश्मीर घाटी में तनाव के बाद अमरनाथ यात्रा रोक दी गई है। शनिवार को किसी भी तीर्थयात्री को जम्मू से अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना होने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर घाटी सुलग उठी है।
अधिकारी ने बताया कि हजारों श्रद्धालु पारगमन शिविरों में दिन गुजार रहे हैं, जो कि एक बालटाल के रास्ते में है और दूसरा पहलगाम के रास्ते में है। वहीं, आधार शिविर में लगभग 5,000 श्रद्धालु हैं।
वानी के मारे जाने के बाद शनिवार को समूची कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प में आठ प्रदर्शनकारी मारे गए। वानी कश्मीर में आतंकवाद का चमकता चेहरा था। इस आतंकवादी के शव को शनिवार को दफनाया गया, जिस रस्म में हजारों लोगों ने भाग लिया।
राजमार्गो पर खतरा होने के कारण किसी भी श्रद्धालु को वहां जाने नहीं दिया जा रहा है।
एक अधिकारी ने बताया, “श्रद्धालुओं को पारगमन शिविर और सुरक्षा बलों के शिविर में ले जाया गया है। सुबह में स्थिति की समीक्षा की जाएगी।”
मुंबई के सुभाष परमार ने आईएएनएस को फोन पर बताया, “मैं यात्रा के लिए आया था, लेकिन मेरे जैसे कई यात्री अटके पड़े हैं।”
उत्तर प्रदेश की वाराणसी की सुमन ने बताया, “मैं घर नहीं लौट पा रही। यहां कोई कार नहीं चल रही। हम बस इंतजार कर रहे हैं। सरकारी अधिकारी कहीं दिख नहीं रहे।”
वाराणसी के मनोज कुमार ने शिकायत की कि यहां कोई खाना नहीं है, रास्ते बंद हैं और कई गाड़ी वाले ले जाने के लिए बहुत ज्यादा पैसे मांग रहे हैं। इसलिए उन्हें मजबूरन इंतजार करना पड़ रहा है।
जम्मू में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उपजे तनाव की वजह से जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से किसी भी यात्री को कश्मीर जाने की अनुमति नहीं दी गई।”
उन्होंने कहा, “इस स्थिति की बाद में समीक्षा की जाएगी। तब तक अमरनाथ यात्रा रुकी रहेगी।”
गौरतलब है कि अब तक अमरनाथ यात्रा सामान्य ही रही है। अब तक 80,000 से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के गुफा में उनके ‘लिंग’ का दर्शन कर चुके हैं। यह समुद्र के स्तर से 3,888 मीटर की ऊंचाई पर है।
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