यह सांप सैंड बोआ प्रजाति का बताया जा रहा है, जिसकी उम्र लगभग एक महीने और लंबाई डेढ़ से दो फीट के आसपास है। उसे देखने बड़ी संख्या में लोग नंदनवन का रुख कर रहे हैं।
इस दुर्लभ सांप को सर्वप्रथम महासमुंद के जंगल में गांववालों ने देखा। देखते ही देखते वहां भीड़ लग गई तो ग्रामीणों ने सांप को पकड़कर महासमुंद के रेंजर मानस राय के हवाले कर दिया। राय ने इस सांप को नंदनवन भेज दिया।
नंदनवन के पशु चिकित्सक डॉ. जयकिशोर जड़िया के मुताबिक, यह सांप विषहीन है, जो मेंढ़क व कीड़े खाते हैं। ऐसा सांप पहली बार देखा गया है।
छत्तीसगढ़ में वन विभाग ने सांपों के सर्वे का जिम्मा नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी को दिया है। सोसायटी के मोइज अहमद ने बताया कि छत्तीसगढ़ में दोमुंहा सांप की इस तरह की प्रजाति पहली बार मिली है। इससे पहले भी दुर्लभ प्रजाति के इंडियन स्मूथ स्नेक और क्रोनेला ब्राचुरेला नाम के सांप भी यहां मिल चुके हैं। साथ ही दुर्लभ प्रजाति के ग्रीन कीलबैक यानी हरा ढोंरिया की खोज भी नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी ने की थी।
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