प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय विश्व धरोहर में शामिल, नीतीश ने दी बधाई

पटना, 16 जुलाई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने बिहार के पर्यटक एवं ऐतिहासिक स्थल प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष को विश्व धरोहरों (वर्ल्ड हेरिटेज साइट) की सूची में शामिल कर लिया।

यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल हाने के बाद नालंदा विश्वविद्यालय की खोई हुई प्रतिष्ठा लौटने की उम्मीद जगी है।

यूनेस्को ने बिहार के गया जिला स्थित महाबोधि मंदिर के बाद बिहार के दूसरे स्थल नालंदा के खंडहर को विश्व धरोहरों में शामिल किया है।

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जिनके लिए 1500 अध्यापक हुआ करते थे। छात्रों में अधिकांश एशियाई देशों- चीन, कोरिया, जापान से आने वाले बौद्घ भिक्षु होते थे। इतिहासकारों के मुताबिक, सातवीं सदी में भारत की यात्रा करने वाले चीनी बौद्ध भिक्षु ह्वेन सांग ने भी अपनी किताबों में नालंदा विश्वविद्यालय की भव्यता का जिक्र किया है।

यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज समिति द्वारा कहा गया कि नालंदा भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। 800 वषरें तक यह ज्ञान का केन्द्र रहा।

नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर को विश्व धरोहर घोषित किए जाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रसन्नता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि राज्य और केन्द्र सरकार की संयुक्त पहल के फलस्वरूप यह हुआ है।

मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, “बिहार और देश के लिए गौरव के इस क्षण में सभी देशवासियों एवं राज्य के नागरिकों को बधाई।”

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