नई दिल्ली , 21 जुलाई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता की याचिका पर महाराष्ट्र के महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया। याचिका में पीड़िता ने भ्रूण के असामान्य विकास को देखते हुए अपने 24 हफ्ते के गर्भ को खत्म कराना चाहा है।
न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर, कुरियन जोसेफ और अरुण मिश्र ने चिकित्सक की रिपोर्ट देखने के बाद इस पर शुक्रवार को सुनवाई करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रूण का पेट खुला है और उसकी आंतें बाहर विकसित हो रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भ्रूण की खोपड़ी भी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है। बच्चे के पैदा होने के बाद बचने की संभावना शून्य से कुछ घंटे के बीच है।
पीड़िता ने अदालत से अपने गर्भपात के लिए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रिग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट 1971 के तहत निर्देश देने की मांग की है। ऐसा इस वजह से 20 हफ्ते से अधिक के गर्भ को खत्म नहीं किया जा सकता। एमटीपी कानून की धारा पांच के तहत 20 हफ्ते से अधिक के गर्भ को केवल तभी खत्म किया जा सकता है, जब मां की जान को खतरा हो।
मौजूदा मामले में मां की जान को खतरा नहीं है, लेकिन भ्रूण असामान्य है और उसके बचने की संभावना नहीं के बराबर है।
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