लखनऊ, 24 जुलाई (आईएएनएस/आईपीएन)। समाजवादी पार्टी (सपा) ने भाजपा-बसपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन जैसे दलों को लगता है कि उनका भविष्य अंधेरे में है और सत्ता से उन्हें दूर रहना होगा। इसलिए इसके नेता उत्तर प्रदेश को बदनाम करने और जनता का ध्यान अनावश्यक मुद्दों पर बांटने की साजिश कर रहे हैं। लेकिन जाति और संप्रदाय की राजनीति करने वालों को जनता भाव नहीं देने वाली है।
लखनऊ, 24 जुलाई (आईएएनएस/आईपीएन)। समाजवादी पार्टी (सपा) ने भाजपा-बसपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन जैसे दलों को लगता है कि उनका भविष्य अंधेरे में है और सत्ता से उन्हें दूर रहना होगा। इसलिए इसके नेता उत्तर प्रदेश को बदनाम करने और जनता का ध्यान अनावश्यक मुद्दों पर बांटने की साजिश कर रहे हैं। लेकिन जाति और संप्रदाय की राजनीति करने वालों को जनता भाव नहीं देने वाली है।
पार्टी ने बसपा मुखिया मायावती की भाजपा और सपा के मिलीभगत जैसी टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि तीन बार भाजपा के सहयोग से अपनी सरकार चलाने वाली और गुजरात जाकर मोदी का प्रचार करने वाली बसपा अध्यक्ष किस मुंह से भाजपा-सपा के मेल की बात करती हैं?
समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चैधरी ने आईपीएन से बातचीत में कहा कि बसपा अध्यक्ष ने राजनैतिक स्तर गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अपने राजनीतिक स्वार्थ साधन के लिए वे कुछ भी कहने और करने में संकोच नहीं करती है।
कुंठित और निराश बसपा अध्यक्ष अनर्गल बयानबाजी करने की आदी हो गई हैं। वह हर बार अपनी पुरानी पोथी निकाल कर घिसा पिटा बयान पढ़ना शुरू कर देती हंै। इसमें सच्चाई कम गलतबयानी ज्यादा लगती है। उन्होंने कहा कि बसपा प्रमुख को समाजवादी पार्टी और सरकार दोनों से चिढ़ है।
सपा प्रवक्ता ने कहा कि समाजवादी सरकार बनने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तबाह और बर्बाद हुए उत्तर प्रदेश को विकास का नया एजेंडा दिया, जनहित की तमाम योजनाएं लागू की जिससे समाज का हर वर्ग लाभान्वित हुआ है।
राज्य का यह विकास विपक्ष को रास नहीं आ रहा है। प्रदेश में विपक्ष केवल नकारात्मक विरोध प्रदर्शन करता रहा है। उन्होंने कहा कि बसपा का काम जनता को भ्रमित करना और अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना रहा है।
तीन बार भाजपा के सहयोग से अपनी सरकार चलाने वाली और गुजरात जाकर मोदी का प्रचार करने वाली बसपा अध्यक्ष किस मुंह से भाजपा-सपा के मेल की बात करती है? सब जानते हैं कि समाजवादी पार्टी ही सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई लड़ती रही है।
भाजपा और बसपा दोनों ने नारी अस्मिता को लांछित करने और अभद्र भाषा के प्रयोग से राजनीति का स्तर गिराया है। इन दोनों दलों की ओछी मानसिकता ने सामाजिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है।
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