माल्या को सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस

नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को शराब कारोबारी विजय माल्या को अदालत की अवमानना के मामले में नोटिस जारी किया। माल्या को कर्ज देनेवाले बैंकों ने माल्या द्वारा अपनी, अपनी पत्नी और अपने बच्चों की भारत और विदेशों में स्थित संपत्तियों का खुलासा नहीं करने को लेकर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की याचिका दाखिल की है।

न्यायमूर्ति कूरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन ने दिवालिया हो चुकी विमानन कंपनी, किंगफिशर के चेयरमैन माल्या को नोटिस जारी किया। महान्यायवादी मुकुल रोहतगी ने न्यायालय को बताया कि माल्या ने अपनी संपत्ति के बारे में गलत ब्योरा दिया है और वह अदालत के आदेशों के प्रति इमानदार नहीं हैं और वह ‘सार्वजनिक धन’ का जबावदेह है, जो उसने बैंकों से कर्ज लिया था।

रोहतगी ने कहा कि माल्या ने ब्रिटिश शराब कंपनी डियाजियो से मिले 4.5 करोड़ डॉलर का खुलासा नहीं किया।

याचिकाकर्ताओं (भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में बैंकों का समूह जिसने माल्या का कर्ज दिया था) ने अदालत से कहा कि माल्या ने सात अप्रैल को दिए गए आदेश का पालन नहीं किया है, जिसमें उसे खुद की, अपनी पत्नी और अपने बच्चों की सभी संपत्तियों का खुलासा करने को कहा गया था।

शीर्ष अदालत ने सात अप्रैल के आदेश में माल्या को उसके, उसकी पत्नी और उसके बच्चों के भारत और विदेशों में स्थित सभी चल-अचल, मूर्त-अमूर्त संपत्तियों और हिस्सेदारियों का खुलासा करने का आदेश दिया था।

शीर्ष अदालत ने सात अप्रैल के आदेश में माल्या से पूछा था कि किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए कर्जो की वसूली को लेकर बैंकों के साथ सार्थक बातचीत से पहले वह कितनी रकम जमा कराएंगे, ताकि उनकी नेकनीयति का पता चल सके।

एसबीआई की अगुवाई में 13 बैंकों के समूह को माल्या से किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए कर्ज और ब्याज को मिलाकर कुल 9,000 करोड़ रुपये की वसूली करनी है।

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