मप्र:नंदू भैया द्वारा संगठन के नुकसान को पाटने का प्रयास ,अमित शाह की भोपाल सभा

31947432_592880821098088_6307960309483044864_nभोपाल(धर्मपथ)– भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कर्नाटक चुनाव की व्यस्तता के बीच भोपाल का दौरा यूं ही नहीं बना.पूर्व अध्यक्ष नन्द कुमार सिंह चौहान के साढे चार वर्षीय सुप्त कार्यकाल के दौरान मप्र भाजपा संगठन को हुए नुकसान को भरने की कवायद एवं केंद्र द्वारा थोपे गए नए मप्र भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह की सर्वमान्यता को ले यह प्रदेश स्तरीय   सम्मेलन किया गया .

मप्र भाजपा में 15 वर्षों में कई नेताओं ने अपना असर और आशाएं बढ़ा ली हैं जिसके चलते अपनी ब्रांडिंग में जुटे शिवराज सिंह इन नेताओं के बढ़ते असर को जानते हुए भी कुछ कर नहीं पाए और अब चुनाव के समय मची खींचतान के चलते एवं अपने भविष्य को ले जो नेता चिंतित हुए वे शिवराज सिंह के लिए ख़तरा बन उभर आये.शिवराज सिह ने अपने पद के प्रभाव से इन नेताओं को मनचाहा तो करने नहीं दिया लेकिन ये नेता चुनावी समर में परेशानी पैदा कर रहे.

पूर्व अध्यक्ष नंदकुमार चौहान और संगठन महामंत्री सुहास भगत के बीच संवाद की स्थिति न रहने का बड़ा खामियाजा मप्र भाजपा संगठन को हुआ है .सत्ता की मलाई बटोरने में व्यस्तता भी पूर्व अध्यक्ष पर भारी पड़ी ,संगठन महामंत्री परोक्ष रूप से इन आरोपों की जद से अपने आप को बचाए हुए हैं लेकिन उनके निज सचिव का नाम बाजार में घूम रहा है जो ट्रांसफर ,पोस्टिंग और ठेकों के सौदों में माहिर माने जाते हैं .

संगठन महामंत्री के ख़ास संगठन मंत्री अतुल राय भी सत्ता के गलियारों में मशहूर हैं इन सबके मुखिया संगठन महामंत्री अपने आप को कितना भी बचाएं लेकिन जब चेले इतने मशहूर हों तो गुरु को पता न हो यह असंभव है.

मप्र की राजनैतिक स्थिति का महीनों पहले आंकलन कर चुके अमित शाह भले ही कर्नाटक चुनाव में व्यस्त हों लेकिन मप्र में बीमार पड़े संगठन की चिंता उन्हें बेसमय मप्र की धरती पर ले आई. 4 घंटे के कार्यक्र्म को 2 घंटे का किया लेकिन वे आये और सन्देश दे गए की शिवराज के नेत्रत्व में चुनाव होंगे लेकिन अगुआई संगठन की याने अमित शाह की रहेगी.

कांग्रेस को कमजोर कहने का नारा एक सुर से निकालते हैं भाजपा नेता 

भाजपा का यह नारा की कांग्रेस ख़त्म हो चुकी है इसे प्रचारित करने में भाजपा के नेता एकमत हैं किन्तु वस्तुस्थिति अलग है ये जनता में यह प्रचार करते हैं की कांग्रेस ख़त्म है लेकिन असली भय इन्हें मप्र में कांग्रेस से ही है.और कमलनाथ के आगाज के बाद अमित शाह और गंभीर हो गए.यह भाजपा के रणनीतिकारों की अपने कर्तव्य के प्रति सजगता दिखाती है.

देखना यह है की शिवराज सिंह के चेहरे की जगह संगठन को इस चुनाव में आगे कर अमित शाह क्या गुल खिलाते हैं ,वैसे अमित शाह की रणनीति चौंकाने वाली है लेकिन मप्र की जनता चौंक कर वोट देती है या 15 वर्ष का आंकलन कर यह चुनावी परिणामों के बाद ही पता चलेगा.

धर्मपथ के लिए अनिल कुमार सिंह की प्रस्तुति 

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