मप्र: संविधान का हनन कर बनायी आदिम जाति मंत्रणा परिषद्,सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों घेरे में

भोपाल- मप्र की सरकार पर संविधान की अनदेखी कर आदिम जाति मंत्रणा परिषद् के सदस्यों के मनोनयन करने का आरोप लगा है,यह खुलासा आर टी आई कार्यकर्ता देवेन्द्र मिश्रा ने सूचना के अधिकार के तहत हासिल किये गए कागजातों के आधार पर लगाया है.उन्होंने इसकी शिकायत मप्र के राज्यपाल से की है एवं प्रति कांग्रेस के विधायक एवं प्रभारी नेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन को एक प्रति भेजी है.

1राज्यपाल को है मनोनयन का अधिकार 

आदिम जाति मंत्रणा परिषद् के सदस्यों के मनोनयन का अधिकार संवैधानिक रूप से राज्यपाल को है .लेकिन वर्त्तमान मनोनयन विभागीय मंत्री ज्ञान सिंह के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने कर दिया जो संविधान की नियमावली के विरुद्ध जाता है .यह सीधा संविधान हनन का मामला है.मिश्रा ने राज्यपाल से मांग की है की तुरंत इस असंवैधानिक परिषद् को निरस्त किया जाय.

विपक्षी आदिम जाति विधायकों को सदस्य नहीं बनाया गया 

सदस्यों के असंवैधानिक मनोनयन में विपक्षी विधायकों को नहीं शामिल किया गया.दरअसल यह परिषद् आदिम जाति वर्ग के लिए उन क्षेत्रों में होने वाली परियोजनाओं एवं अन्य कल्याणकारी कार्यों पर नजर रखती है .अनुसूचित जाति वर्ग की योजनाओं में इस वर्ग के हितों का संरक्षण यह परिषद् करती है .इन कार्यों को परिषद् के समक्ष राज्यपाल द्वारा भेजा जाता है.

कद्दावर भाजपा विधायक एवं मंत्री विजय शाह को इस परिषद् से दूर रखा गया 

इस परिषद् में तेज-तर्रार भाजपा विधायक एवं मंत्री विजय शाह को मुख्यमंत्री ने नहीं रखा.आदिवासी अंचलों में आने वाली परियोजनाओं के निष्कंटक अनुमोदन एवं परिचालन वजह रही.इसके पीछे उद्देश्य रहा की आने वाले निवेश एवं परियोजनाएं मनमर्जी से चलाई जा सकें.

रद्द हुई परिषद् के पुनर्गठन की मीटिंग 

इस परिषद् के पुनर्गठन से सम्बंधित मीटिंग आने वाले हफ्ते में होने वाली थी लेकिन मामला सामने आते ही इसे रद्द करने की सूचना सामने आ गयी जिसकी पुष्टि एक वरिष्ठ अधिकारी ने की है.

कांग्रेसी विधायक एवं प्रभारी नेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन भी संदेह के घेरे में 

इस परिषद् के असंवैधानिक होने सम्बंधित मामले का खुलासा होने के साथ एक प्रति बाला बच्चन को भी दी गयी लेकिन जब उनसे इस मामले के सम्बन्ध में जानकारी चाही गयी तो उन्होंने अनभिज्ञता प्रगट की,उन्होंने कहा की इस विषय में उन्हें कोई जानकारी नहीं जबकि देवेन्द्र मिश्रा ने उन्हें स्वयं मिलकर यह मामला सौंपा था.बाला बच्चन की यह अनिभिज्ञता उन्हें संदेह के घेरे में लाती है.सूत्रों ने बताया की जब बाला बच्चन को यह मामला सौंपा गया उसके तुरंत बाद उनके सचिव मुख्यमंत्री निवास की तरफ रवाना हो गए थे.

जब इस मामले में अधिकारीयों की राय मांगी गयी तो संदेह और पुष्ट होते गए 

अजय तिर्की जो राजभवन के प्रमुख सचिव हैं ने फ़ोन नहीं उठाया .

प्रेमचंद्र मीणा जो सन २०१४ में प्रमुख सचिव थे ने कहा उन्हें कुछ याद नहीं .

बाला बच्चन ने कहा उनकी जानकारी में नहीं है .

विजय शाह का फ़ोन नहीं लगा .

 

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