(भोपाल)– वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह को अपनी ही पार्टी के विधायक एवं प्रभारी नेता प्रतिपक्ष बाला-बच्चन को सिंहस्थ मामले को उचित रूप से न उठाने की नसीहत ट्वीट के माध्यम से देना सामान्य बात नहीं है .दिग्विजय सिंह जैसे अनुभवी नेता का यह कदम कांग्रेसी “सेटिंग बाजों” को सतर्क करने के लिए काफी है.
हम पहले भी लिख चुके हैं की सत्ता से दूर रह रहे कुछ कांग्रेसी विभीषण नियमित सत्ता का दरबार दर्शन करते हैं .बाला-बच्चन के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं की वे सत्ता पक्ष से “सेट” हैं .18 जुलाई की बैठक में तय था की सिंहस्थ में हुए भ्रष्टाचार को पुरजोर तरीके से सदन में उठाया जाएगा लेकिन 19 जुलाई को गुरुपूर्णिमा पर्व की छुट्टी के बहाने बाला-बच्चन सेट हो गए.
आदिम जाति मंत्रणा परिषद् के गठन में हुए संविधान हनन के मामले के कागजात बाला-बच्चन को दिए गए जो शाम 5 बजे की घटना थी लेकिन रात्रि 8 बजे जब पत्रकारों ने इस संबंद्ध में उनकी राय जानना चाही तब उन्होंने मामले की जानकारी ना होने की बात कही.इस तरह के मामले आते ही बाला-बच्चन के सचिव का बा-बार एक ख़ास मुकाम पर दौरा इस शंका को बल देता है .आखिर सत्ता के केंद्र निवास पर इतना आना जाना किस कारण से .
यह उस खबर की लिंक है जिसमें हम इस बात को पहले की लिख चुके हैं.
मप्र: संविधान का हनन कर बनायी आदिम जाति मंत्रणा परिषद्,सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों घेरे मेंhttp://www.dharmpath.com/p99212/
दिग्विजय सिंह अपने कार्यकाल में बाला -बच्चन को मंत्री के रूप में कार्य करते देख चुके हैं और वे बाला-बच्चन के कद से भली-भाँती परिचित हैं.इसलिए उन्होंने विधानसभा चलते हुए इस क्रिया कलाप पर रोक लगाई .उनके इस सन्देश से बाकी विभीषणों से भी कांग्रेस को सुरक्षित होने की उम्मीद जागी है.
भाजपा इस घटना को राजा रजवाड़ों द्वारा दलित को स्वीकार न कर पाना कह मोड़ने के प्रयास में है वहीँ कांग्रेसी प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने कहा की बाला बच्चन विधायक हैं एवं उन पर हमारा बस नहीं हम संगठन हैं.
के.के.मिश्रा का यह बयान भी कांग्रेस के अन्दर के द्वन्द को प्रदर्शित करता है.राजनीती कुछ भी कहे लेकिन बाला-बच्चन के रूप में दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की कमजोरी का पर्दाफ़ाश कर दिया है.
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