नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार (30 जुलाई) को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की छात्र नेता ओइशी घोष के खिलाफ जारी गैर-जमानती गिरफ्तारी वॉरंट रद्द कर दिया है.
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला ओइशी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 (सरकारी कर्मचारी के आदेश का पालन न करना), 447 (आपराधिक घुसपैठ) और 34 (साझा मंशा) के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है.
इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को ही गैर-जमानती वॉरंट पर रोक लगा दी थी और ओइशी घोष को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था.भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) के नेता और सांसद जॉन ब्रिटास ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर यह जानकारी दी.
उन्होंने लिखा, ‘दिल्ली पुलिस ने 2021 के इस मामले को पूरी तरह से बदले की भावना और हिसाब-किताब बराबर करने के मकसद से फिर से उठाया है.’
दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में पुलिस के साथ कुछ देर तक चली तनातनी के बाद पार्टी सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा था, ‘दिल्ली पुलिस जिस तरह व्यवहार कर रही है, उससे मैं स्तब्ध और आक्रोशित हूं. आज दिल्ली पुलिस के अधिकारी एक राष्ट्रीय पार्टी माकपा के कार्यालय में जबरन घुस आए. वे छात्र नेता ओइशी घोष को कस्टडी में लेना चाहते थे. वह जंतर-मंतर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं.’
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