नई दिल्ली – सोने की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय परिवार अपने गहने बेचने के बजाय उन्हें गिरवी रखकर पैसा जुटाने को तरजीह दे रहे हैं। घर की तिजोरी में रखा सोना अब सिर्फ बचत या जरूरत के वक्त बेचने की चीज नहीं रह गया है। बढ़ती कीमतों के बीच यही सोना कर्ज लेने का जरिया भी बनता जा रहा है। लोग अपने गहने बेचने के बजाय उन्हें गिरवी रखकर पैसा जुटा रहे हैं और इसका असर गोल्ड लोन के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है।
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी (NBFC) का सोने के गहनों के बदले दिया गया कर्ज सालाना आधार पर 69.3% बढ़कर ₹3.41 लाख करोड़ पहुंच गया। मई में भी इस कर्ज में करीब 70% की सालाना बढ़ोतरी हुई थी। यानी गोल्ड लोन की रफ्तार बाकी खुदरा कर्ज के मुकाबले काफी तेज बनी हुई है।
जब सोने की कीमत बढ़ती है तो घर में रखे गहनों की बाजार कीमत भी बढ़ जाती है। ऐसे में ग्राहक उसी सोने को गिरवी रखकर पहले के मुकाबले ज्यादा रकम जुटा सकता है। दूसरी तरफ ग्राहक को अपना सोना बेचना नहीं पड़ता।वह जरूरत पूरी करने के बाद कर्ज चुका देता है और गहने वापस ले सकता है। यही वजह है कि बढ़ती कीमतों के दौर में सोना नकदी जुटाने की संपत्ति के रूप में भी ज्यादा उपयोगी हो गया है। विश्व स्वर्ण परिषद के मुताबिक जून के अंत तक बैंकों और एनबीएफसी दोनों के सोने के कर्ज में तेज बढ़ोतरी देखी गई थी।
गोल्ड लोन बाजार अब सिर्फ पारंपरिक गोल्ड लोन कंपनियों तक सीमित नहीं रह गया है। आदित्य बिड़ला कैपिटल (Aditya Birla Capital) ने इस कारोबार में प्रवेश करने की घोषणा की है और अगले तीन वर्षों में करीब 1,000 शाखाएं खोलने की योजना बनाई है।इस कारोबार की सबसे बड़ी खासियत सुरक्षित कर्ज (Secured Loan) है। गोल्ड लोन में ग्राहक के गहने कर्ज के बदले सुरक्षा के तौर पर रखे जाते हैं। अगर ग्राहक कर्ज नहीं चुका पाता तो नियमों के तहत कर्जदाता के पास गिरवी रखे सोने से अपनी रकम की वसूली करने का रास्ता रहता है। यही वजह है कि वित्तीय कंपनियों को यह कारोबार बिना सुरक्षा वाले कर्ज के मुकाबले ज्यादा नियंत्रित जोखिम वाला लगता है। इसके अलावा भारत में परिवारों के पास बड़ी मात्रा में सोना मौजूद है। यानी इस कारोबार के लिए कर्ज देने वाली कंपनियों के पास संभावित ग्राहकों और गिरवी रखने योग्य संपत्ति का बड़ा आधार पहले से मौजूद है।
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