नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान (अप्रैल-जनवरी) व्यापार घाटा घटकर 106.8 अरब डॉलर रहा है, जो वर्ष 2014-15 की इसी अवधि के दौरान 119.6 अरब डॉलर था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करते हुए यह जानकारी दी।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि 2015-16 की पहली छमाही के दौरान भारत की सीएडी (भुगतान संतुलन स्थिति) आरामदायक रही है। सीएडी के कम स्तर के साथ-साथ पूंजी आवक में थोड़ी बढ़ोतरी से विदेशी मुद्रा का भंडार 2015-16 की पहली छमाही में 10.6 अरब डॉलर बढ़ा है। 5 फरवरी, 2016 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 351.5 अरब डॉलर रहा, जिसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 328.4 अरब डॉलर (कुल की 93.4 प्रतिशत) तथा सोना 17.7 अरब डॉलर के बराबर रहे हैं।
सर्वेक्षण में कहा गया कि चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-जनवरी) के दौरान निर्यात में बढ़ोत्तरी दर घटकर 17.6 प्रतिशत रह गई है और यह 217.7 अरब डॉलर पर आ गई है। पेट्रोलियम तेल लुब्रीकेंट्स (पीओएल) का आयात कम होने से कुल आयात में कमी आई है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि निर्यात में मंदी अभी कुछ समय जारी रह सकती है। वहीं, उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्य में वैश्विक स्तर पर कमी जारी रहने से व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा कम होगा। इस साल चालू खाता घाटा एक से डेढ़ प्रतिशत के कम स्तर पर रहने की संभावना है।
इसमें बताया गया है कि 2015-16 के दौरान (अप्रैल-जनवरी) रुपये की औसत विनिमय दर घटकर 65.04 रुपये प्रति डॉलर रही, जो 2014-15 की इसी अवधि में 60.92 रुपये प्रति डॉलर थी।
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