नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड के मुद्दे पर मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही एक बार फिर बाधित रही।
वाम दलों, समाजवादी पार्टी(सपा)और बहुजन समाज पार्टी(बसपा)सहित अन्य दलों के समर्थन से कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की।
कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।
शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी इस सत्रावधि में उत्तराखंड में राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा और प्रस्ताव पारित कराना चाहती है। केंद्र सरकार ने वहां लोकतांत्रिक रूप से चुनी सरकार को अस्थिर कर दिया है।
उन्होंने कहा, “जब घोषणा होती है कि चर्चा हो सकती है और अगर सदन भी राजी है कि चर्चा हो सकती है, तो यह अभी क्यों नहीं हो सकती है?”
सदन में नरेश अग्रवाल और बसपा नेता मायावती ने शर्मा का समर्थन किया।
उधर, राज्यसभा के नेता अरुण जेटली ने कहा कि उद्घोषणा से पहले चर्चा नहीं कराई जा सकती है।
जेटली ने कहा, “जहां तक संविधान के अनुच्छेद 356 और उत्तराखंड का सवाल है तो हम लोगों को भी बहुत कुछ कहना है। ऐसा कभी नहीं हुआ है कि सदन के पीठासीन अधिकारियों ने अल्पसंख्यक को बहुसंख्यक और बहुसंख्यक को अल्पसंख्यक बना दिया गया हो। वास्तव में यह संविधान की धज्जियां उड़ाना है।”
उन्होंने कहा, “57 सदस्यों में 35 कहते हैं कि उन्होंने वित्त विधेयक के खिलाफ मतदान किया है और पीठासीन अधिकारी कहते हैं कि अल्पसंख्यक बहुसंख्यक हैं। अगर सदन में कोई चर्चा होती है तो हम लोग अवश्य भाग लेंगे। लेकिन उद्घोषणा से पहले चर्चा कराने की प्रक्रिया नहीं है।”
इसके बाद कांग्रेसी सदस्य नारे लगाते हुए सभापति की आसंदी के करीब इकट्ठा हो गए। इस पर सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
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