राज्यपाल ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि वह डीएनडी से टोल टैक्स हटाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के जरिए राज्यपाल को बताया कि नोएडा-दिल्ली के बीच आवागमन को बेहतर बनाने के लिए यमुना नदी पर ओवरब्रिज बनाने के लिए नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड एवं नोएडा प्राधिकरण के बीच 1997 में एकतरफा व अवैधानिक अनुबंध हुआ था, जिसमें सर्वाधिक विवादित 20 प्रतिशत सुनिश्चित मुनाफे की क्लोज है, जिसको हटाने को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट ने भी 31 दिसंबर 2013 को दिशा निर्देश दिए थे, और इस परिपेक्ष्य में नोएडा प्राधिकरण ने भी इसको हटाने की संस्तुति की थी। लेकिन आज तक यह विवादित क्लोज भी नहीं हटाई गई है।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि इसके अलावा डीएनडी की प्राइमरी प्रोजेक्ट कॉस्ट 193 करोड़ थी, जिसे फर्जी खर्च डालकर बाद में 408 करोड़ रुपये दिखाया गया है, इसके विरुद्ध भी कंपनी के अनुसार वह वर्ष 2015 तक टोल टैक्स के रूप में 913 करोड़ रुपये वसूल चुकी है, जबकि कंपनी तीन हजार करोड़ का घाटा दिखा रही है। यह घाटा बढ़कर वर्ष 2030 तक 50 हजार करोड़ रुपये हो जाएगा।
ज्ञापन में बताया गया है कि अनुबंध की शर्तो के अनुसार, कंपनी के खर्च की जांच के लिए निष्पक्ष ऑडिटर से जांच होनी थी, जिसे कंपनी अपनी निजी पेड कंपनी से कराती है, इसके लिए भी कंपनी के हिस्सेदार नोएडा प्राधिकरण ने भी कैग से ऑडिट जांच की संस्तुति की है, सरकार ने आज तक यह जांच भी नहीं कराई है।
मोर्चा ने राज्यपाल से मांग की है कि वह टोल टैक्स के नाम पर हो रही लूट से जनता को बचाने के लिए प्रदेश सरकार को निर्देशित करें। सरकार तत्काल 20 प्रतिशत मुनाफे की क्लोज को समाप्त करे और सीएजी से ऑडिट कराए तथा लागत से कई गुना वसूली हो जाने के कारण टोल टैक्स वसूली बंद कर जनता को राहत दे।
राज्यपाल से मुलाकात करने वालों में मनवीर नागर (संयोजक, गौतमबुद्धनगर), सुनील नागर, सुनील भाटी, अनिल कुमार गुप्ता, हिमांशु नागर व मनोज कुमार कटारिया भी शामिल थे।
dharmpath.com dharmpath