नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की, जिसमें कहा गया है कि उर्दू लेखक यह घोषणापत्र दें कि उनकी पुस्तकों की सामग्री सरकार या देश के खिलाफ नहीं होगी।
सिंह ने कहा, “यह निंदनीय है। यदि मंत्रालय ने ऐसी शर्त लगाई है तो यह सभी भाषाओं के लेखकों के लिए होनी चाहिए। वे केवल उर्दू लेखकों को ही निशाना क्यों बना रहे हैं? भाजपा ऐसा सिर्फ इसलिए कर रही है कि उसका एकमात्र एजेंडा है कि देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटें और शासन करें।”
उर्दू भाषा को प्रोत्साहन देने वाली राष्ट्रीय परिषद ‘नेशनल काउंसिल फॉर प्रोमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज’ (एनसीपीयूएल) ने हाल ही में एक फार्म जारी किया है। उसमें किताब के लेखकों को हर साल यह घोषित करना है कि किताब की सामग्री सरकार या देश के खिलाफ नहीं होगी।
लेखकों को दिए गए इस फार्म में लिखा गया है, “मैं..पुत्र/पुत्री.. इस बात की पुष्टि करता हूं कि मेरी पुस्तक/पत्रिका जिसका शीर्षक.. है और जिसे एनसीपीयूएल ने थोक खरीद के लिए अनुशंसा की है, उसमें भारत सरकार की नीतियों या राष्ट्रहित के खिलाफ कुछ भी नहीं है, यह देश के विभिन्न वर्गो के तालमेल को खराब करने का कारण नहीं बनेगा और इसे किसी भी सरकार या गैर सरकारी संस्था से आर्थिक सहायता नहीं दी गई है।”
एनसीपीयूएल उर्दू लेखकों को आर्थिक सहायता देती है और स्मृति ईरानी के नेतृत्ववाले मंत्रालय के तहत आता है।
‘भारत माता की जय’ नारे को लेकर उपजे विवाद पर दिग्विजय सिंह ने कहा, “इस पर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। शासन चलाने और विकास में अपनी नाकामी को छुपाने के लिए वे लव जेहाद, घर वापसी, रामजादा-हरामजादा और अब भारत माता की जय जैसे मुद्दे वे उठाते रहते हैं। ओवैसी इनसे मिले हुए हैं।”
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