कान्स फिल्मोत्सव के लिए चुनी गई ‘सेवन इयर्स टू ग्रेस’

प्रेस क्लब में गुरुवार को आयोजित रू-ब-रू कार्यक्रम में फिल्म निर्माता एवं निर्देशक शनि चंद्रा ने कहा कि यह शून्य बजट पर बनाई गई फिल्म है। इसमें सोनमती नामक मुख्य किरदार है जिसे कुष्ठ रोग हो जाता है। समाज के लोग उसे पति से जबरन तलाक दिलाकर गांव से बाहर निकाल देते हैं।

कुछ वर्षों तक वह इधर-उधर भटक कर जीवन बिताती है। बाद में जांजगीर चांपा स्थित बीएल होम हॉस्पिटल जाती है, जहां उसका इलाज होता है और वह ठीक हो जाती है। फिर वह अपने परिवार से जुड़ जाती है।

ऐसा होने में सात वर्ष लग जाते हैं। इन सात वर्षो में उसे किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उन सभी ²श्यों को फिल्माया गया।

चंद्र ने बताया कि फिल्म की कहानी उनके सर्जन पिता डॉ. राजेश चंद्रा के अंग्रेजी उपन्यास ‘सेवन इयर्स टू ग्रेस’ से ली गई है। उनकी मां डॉ. वीना चंद्रा भी गायनिकोलॉजिस्ट हैं।

उन्होंने बताया कि 13 मिनट की इस फिल्म का फिल्मांकन चांपा एवं कोरबा के पुरैना में की गई है। शून्य बजट पर बनी इस फिल्म में चचेरे भाइयों एवं दोस्तों का सहयोग रहा।

चंद्रा ने बताया कि फिल्म की शूटिंग महज 7 दिनों में की गई। डायरेक्शन व एडिटिंग का कार्य स्वयं किया। कान्स का फेस्टिवल 13 मई को शुरू होने वाला है।

उन्होंने कहा कि कुछ फेस्विटल में इस फिल्म के चयन न होने से निराश थे तथा कान्स में डॉक्यूमेंट्री केटेगरी न होने की वजह से वे इसके लिए आवेदन नहीं कर रहे थे। उनकी मां ने इंटरनेट पर रिसर्च कर यह पता किया कि इस फेस्टिवल में डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म केटेगरी में रखा गया है। उनके प्रेरित करने पर अंतिम क्षणों में कान्स के लिए फिल्म के चयन संबंधी आवेदन किया।

अब शायद यह मां का आशीर्वाद ही था कि इतने बड़े प्लेटफार्म पर इस फिल्म को जगह मिल गई।

चंद्रा के पिता डॉ. राजेश चंद्रा के उपन्यास पर काम चल रहा है। उस पर आधारित फिल्म चंद्रा ने बनी जो कान्स तक पहुंची और उनकी हिग्िंलश में प्रकाशित होने वाले उपन्यास फ्रीडम? इज दिस द फ्रीडम वी वान्टेड जिस पर भविष्य में फीचर फिल्म बनाने का विचार है, वह भी इसी फेस्टिवल के दौरान प्रकाशित होने जा रही है।

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