पटना, 8 फरवरी (आईएएनएस)। संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. कश्यप ने यहां सोमवार को कहा कि लोकसभा या विधानसभा की कार्यवाही में बाधा डालना, सदन न चलने देना भी सदन की अवमानना है।
उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में प्रतिपक्ष व्यापक अर्थो में सरकार का अंग माना जाता है, लेकिन अफसोस है कि हमारे यहां ऐसे प्रतिपक्ष की संस्कृति बन गई है कि वह अपने को सरकार का दुश्मन समझता है।
बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस समारोह के दूसरे दिन अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने दल के नेताओं से सदन जरूर चलने देने की अपील की।
उन्होंने बिहार विधानमंडल सदस्यों को जनता से जुड़े रहने की सलाह देते हुए कहा कि जनता और जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच खाई दुखद है। इससे न देश का भला हो सकता है और न ही लोकतंत्र का।
कश्यप ने कहा कि सदन परिसर में किसी अपराध के लिए किसी सदस्य की गिरफ्तारी नहीं हो सकती। कोई वारंट-सम्मन भी प्रभावी नहीं होता। सदन की समितियां किसी व्यक्ति को बुला सकती है, कोई दस्तावेज मांग सकती है।
संविधान विशेषज्ञ कश्यप ने बिहार विधानमंडल दल के सदस्यों को विशेषाधिकार की जानकारी देते हुए बताया कि संसदीय विशेषाधिकार सदन के अंदर और समितियों के काम करने तक सीमित है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर कोई जिलाधिकारी सीट से खड़ा होकर किसी विधायक का स्वागत नहीं करता तो यह हमारे संस्कार और सरकार के निर्देशों का उल्लंघन हो सकता है, विशेषाधिकार का हनन नहीं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को बिहार विधानसभा के दो दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन किया था।
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