शिमला, 19 सितम्बर (आईएएनएस)। कुल्लू में 22 अक्टूबर से शुरू हो रहे सप्ताह भर के दशहरा उत्सव के दौरान केवल सरकार द्वारा स्वीकृत जियोग्राफिक इंडीकेटर (जीआई) चिन्ह वाले हैंडलूम उत्पादों की बिक्री की ही अनुमति दी होगी।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय कुल्लू दशहरा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
सरकार द्वारा जारी एक वक्तव्य के मुताबिक, यह निर्णय हस्तनिर्मित कुल्लू शॉलों की बिक्री बढ़ाने में मददगार होगा, जिससे स्थानीय बुनकरों को लाभ मिलेगा।
माना जाता है कि दशहरा उत्सव के दौरान आने वाले कई व्यवसायी लुधियाना और अन्य जगहों से शॉल लाकर उन्हें कुल्लू शॉल कहकर बेचते हैं। इसे रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
पिछले वर्ष कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान लड़कियों और महिलाओं समेत 8,760 नृत्यांगनाओं ने लड़की बचाओ का संदेश देते हुए नृत्य किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद हजारों महिलाओं को लड़की बचाने की शपथ दिलाई थी।
कुल्लू के उपायुक्त राकेश कंवर ने आईएएनएस को बताया कि इस बार 12,000 महिलाओं और लड़कियों ने स्वेच्छा से इस कार्यक्रम में भाग लेने की स्वीकृति दी है।
कंवर के मुताबिक, “हम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए नामांकन कराने वाले हैं।”
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