नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। पार्टनरशिप टु फाइट क्रॉनिक डिजीजेस (पीएफसीडी) ने नेशनल हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर (एनएचएसआरसी) के साथ मिलकर एक पेपर ‘एनसीडी इन द डेवलपमेंट एजेंडा’ जारी किया है।
यह प्रपत्र सभी स्तरों पर निर्णय लेने वाले लोगों को गैरसंक्रामक बीमारियों के लगातार बढ़ रहे बोझ के विषय में संवेदनशील करने का एक प्रयास है।
पीएफसीडी के अध्यक्ष डॉ. केनेथ थोर्प ने कहा, “एनसीडी का बढ़ता बोझ इस सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता से अकेले निपटने में सरकार के सामथ्र्य को सीमित करता है। कोई भी एक कंपनी इससे जुड़ी चुनौतियों से सफलतापूर्वक नहीं निपट सकती है।”
एनएचएसआरसी के कार्यकारी निदेशक डॉ. संजय कुमार ने नीति एवं विकास एजेंडे पर जोर देते हुए कहा, “2014 में भारत में अनुमानित 98.16 लाख मौतें हुईं थीं, इनमें से 60 प्रतिशत (5,869,000) हिस्सेदारी एनसीडी की थी। एनसीडी न सिर्फ स्वास्थ्य एवं जीवन गुणवत्ता को प्रभावित करता है बल्कि उत्पादकता एवं आर्थिक विकास पर भी बुरा असर डालता है।”
उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कई मोर्चो पर कार्यो की शुरुआत की है लेकिन बीमारी का बोझ इतना अधिक होने के कारण सरकार अपने दम पर इस मुद्दे से निपटने में सक्षम नहीं होगी।”
डॉ थोर्प के मुताबिक, “हमारे निर्वाचित एवं नामित प्रतिनिधि न सिर्फ लोगों में जागरूकता फैलाने बल्कि संसाधनों को गतिशील बनाने और शुरुआती जांच, पहचान व प्राथमिक देखभाल को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी संबंधित समूहों से सहयोग प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”
उन्हांेने कहा कि देश भर के विशेषज्ञों से एकमत से इस पहल के लिए सुझाव प्राप्त हुए हैं।
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