चुनावी बांड ‘प्रतिगामी’, दलों को सरकारी फंडिंग मिले : येचुरी

नई दिल्ली, 9 जनवरी (आईएएनएस)। मार्क्‍सवादी क्मयुनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम ेयेचुरी ने मंगलवार को चुनावी बांड के विचार को ‘प्रतिगामी’ करार दिया और कहा कि राजनीतिक दलों को राष्ट्र से वित्तपोषण मिलना चाहिए तथा कॉरपोरेट द्वारा सीधे राजनीतिक दलों को चंदा देने पर रोक लगनी चाहिए।

वित्तमंत्री अरुण जेटली को लिखे पत्र में, येचुरी ने चुनावी बांड को वापस लेने की मांग की और कहा, “चुनाव अब व्यापक उद्यम बन गया है। अब चुनाव लड़ना केवल अमीर लोगों के लिए ही संभव रह गया है। इसमें कड़े सुधार करने की आवश्यकता है। शुरुआत में, राजनीतिक दलों को कॉरपोरेट चंदे पर रोक लगाना अच्छा कदम रहेगा।”

उन्होंने कहा कि बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां राजनीतिक दलों को ‘निवेश’ के रूप में चंदा देती है और यह सरकारी नीतियों को अपने हित में मोड़ने का सबसे आसान तरीका है।

उन्होंने कहा, “ये कंपनियां भ्रष्टाचार की आपूर्ति करती है, जो हमारी प्रणाली को खराब कर रही है। जब तक कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा राजनीतिक दलों को चंदा देने पर रोक नहीं लगाई जाती, तब तक इस समस्या का समाधान नहीं होगा।”

राजनीतिक दलों को राष्ट्र की तरफ से वित्त पोषण मुहैया कराए जाने की सिफारिश करते हुए येचुरी ने कहा, “राष्ट्र की तरफ से वित्त पोषण के बिना राजनीतिक वित्तपोषण की गंदगी की सफाई संभव नहीं है।”

उन्होंने कहा, “कॉरपोरेट सोशल भागीदारी (सीएसआर) की तरह ही कॉरपोरेट्स को अपनी कमाई का एक हिस्सा एक पूल में दान करने के लिए कहा जा सकता है, जिससे कुछ दिशा निर्देशों के मुताबिक राजनीतिक दलों का वित्त पोषण किया जा सकता है। (जैसे कि किसी दल को चुनाव में कितने प्रतिशत वोट मिले, या कितनी सीटें उसने जीती, इस आधार पर राष्ट्र द्वारा उसका वित्त पोषण किया जा सकता है)। यह भारतीय लोकतंत्र के सही तरीके से काम करने के लिए कहीं अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी तरीका होगा।”

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