गुवाहाटी, 11 नवंबर (आईएएनएस)। प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन, युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के महासचिव अनूप चेतिया को बांग्लादेश से 18 साल बाद भारत लाए जाने का सकारात्मक असर केंद्र-राज्य सरकार और उल्फा के एक धड़े की वार्ता पर पड़ेगा। उल्फा के वार्ता करने वाले धड़े के अध्यक्ष अरबिंद राजखोवा हैं।
उल्फा के वार्ता समर्थक गुट की एक प्रमुख मांग चेतिया के प्रत्यर्पण की भी थी। सरकार के साथ वार्ता की यह प्रक्रिया 2010 से चल रही है।
असम पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि चेतिया के दो अन्य सहयोगियों -लखी प्रसाद गोस्वामी और बाबुल सरमा- को भी वापस असम लाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि चेतिया को असम लाने में एक-दो दिन लग सकते हैं, क्योंकि कुछ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ करना चाहेंगी। उन्होंने कहा, “फिर भी हम उसे (चेतिया को) लाने (असम) जा रहे हैं, क्योंकि उसके खिलाफ अधिकांश मामले असम में दर्ज हैं।”
बांग्लादेश के अखबारों में बुधवार को छपा कि 1997 से बांग्लादेश की जेल में बंद चेतिया को भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
असम के तिनसुखिया जिले के जेराई गांव में जन्मा चेतिया उल्फा के संस्थापक सदस्यों में शामिल है।
चेतिया को बांग्लादेश में 1997 में विदेशी एवं पासपोर्ट कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस पर सोलह देशों की मुद्राएं और हथियार रखने समेत कई आरोप लगाए गए थे।
भारत सरकार बांग्लादेश से प्रत्यर्पण संधि नहीं होने की वजह से उसे वापस नहीं ला सकी थी। लेकिन, 2013 में दोनों देशों के बीच यह संधि हो जाने के बाद उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हो गई। चेतिया ने खुद भारत भेजे जाने की इच्छा जताई थी।
बांग्लादेश ने 2009 में उल्फा के अध्यक्ष अरबिंद राजखोवा और उल्फा की सशस्त्र इकाई का उपप्रमुख राजू बरुआ समेत कई नेताओं को भारत को सौंप दिया था। इसके बाद इन नेताओं के साथ केंद्र और राज्य सरकार की वार्ता शुरू हुई थी।
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