उइके ने तोंडामरका में 14 से 15 नक्सलियों को मारने के पुलिस के दावे को झूठा कहा और बताया कि इस मुठभेड़ में सिर्फ एक नक्सली मारा गया था।
पर्चे में लिखा है कि चिंतागुफा, चिंतलनार, बुर्कापाल, किस्टाराम के कैंपो से एसटीएफ और डीआरजी के करीब 2000 जवानों ने तोंडामरका इलाके में नक्सलियों को घेरने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस को वापस लौटना पड़ा था। पर्चे के माध्यम से पुलिस पर उलटे ग्रामीणों को प्रताड़ित करने और दो किसानों को नक्सली बताकर मारने का आरोप लगाया है।
उइके ने आरोप लगाया, “22 जून से 26 जून तक दंतेवाड़ा, बीजापुर के पुलिस व अद्धसैनिक बलों के जवानों ने किरंदुल, गंगालूर, बासागुड़ा के हिरोली, गंपूर, डोडीतुमनार, कुव्वेम, तामोडी, पीडिया, मिरगानगोटोड, इस्मागोंडा सहित कई गांवों में लूटपाट की है। इस दौरान डोडीतुमनार में दो महिलाओं की इतनी पिटाई की गई कि वह बेहोश हो गई। वहीं पीडिया गांव में हपका गुज्जा और मिरगानटांड के निवासी ओयाम भीमा की पुलिस ने नक्सली बताकर हत्या कर दी।” ऊइके ने दोनों को किसान बताया है, लेकिन पर्चे में शहीद बताकर ‘लाल सलाम’ भी किया है।
उप पुलिस महानिरीक्षक पी.सुंदरराज ने कहा, “नक्सलियों के पर्चे की जानकारी मिली है, जो गणेश उइके के नाम से जारी है। अभी ये स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि पर्चा गणेश उइके ने ही जारी किया है। ये नक्सलियों की खोखली धमकी है, बस्तर में बढ़ते पुलिस के दबाव व ऑपरेशन प्रहार से नक्सली दहशत में है, वे बौखलाहट में पर्चे फेंक रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “हमें ऐसे इनपुट भी मिले हैं कि बस्तर में सक्रिय नक्सली लीडर डरकर दूसरे राज्यों में शरण ले रहे हैं। हमारे जवानों के हौसले बुलंद हैं और नक्सलियों की गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण लगातार हो रहा है। मुठभेड़ में भी हमारे जवान नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं।”
उन्होंने पर्चे के माध्यम से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।
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