जगार में लौह, लकड़ी, जूट, मिट्टी, बांस, कौड़ी, गोदना, पत्थर आदि परंपरागत सामग्रियों से निर्मित विभिन्न प्रकार की कलात्मक वस्तुएं विक्रय के लिए उपलब्ध हैं। यह प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात नौ बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। यहां प्रतिदिन शाम सात बजे से नौ बजे तक संस्कृति विभाग के सहयोग से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। हाथ करघा बुनकरों ने भी अपने हाथों से निर्मित कलात्मक वस्त्रों के स्टॉल लगाए हैं।
जगार में छत्तीसगढ़ के साथ ही महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, नई दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब, आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश के कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई है। इसके मुख्य आकर्षण लाख की चूड़ियां, ब्लॉट प्रिंट, बनारसी साड़ी, ग्लास वर्क, ड्राई फ्लावर जैसी कलाकृतियां हैं। इसके साथ ही जगार में छोटे से बड़े हर प्रकार की चीनी मिट्टी से बने क्रॉकरी आयटम भी हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शुक्रवार की रात इसका शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्पियों को भी 50 हजार से लेकर पांच लाख रुपये तक का ऋण बगैर कोई जमानत के मिल सकेगा। राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को प्राथमिकता के साथ इन शिल्पकारों को ऋण मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि हस्तशिल्प को भी राज्य सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना में शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्य के पांच सिद्धहस्त शिल्पकारों को राज्य स्तरीय पुरस्कार 2016 से सम्मानित किया। इनमें रायगढ़ जिले की शिल्पी गुलापीबाई, कोंडागांव जिले के मदन नेताम, लौहशिल्पी सुनील विश्वकर्मा, गोदना शिल्पकला में सरगुजा जिले की सुशीला भगत और भित्तिचित्र कला के लिए राजकुमारी को पुरस्कार प्रदान किया गया।
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