नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय जम्मू एंड कश्मीर ट्रेडर्स एंड मैन्युफैक्चर्स फेडरेशन (जेकेटीएमएफ) की राज्य सरकार के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिका पर आगामी 30 मई को सुनवाई करेगा।
राज्य उच्च न्यायालय ने जेकेटीएमएफ को निर्देश दिया है कि वह इस बात को लेकर एक हलफनामा दे कि अगर उनके द्वारा आपूर्ति किया गया खाद्य पदार्थ खाने लायक नहीं होगा, तो उनकी उत्पादन इकाई सील कर दी जाएगी।
वरिष्ठ वकील जयंत भूषण ने जब न्यायालय से कहा कि खाद्य निर्माण एवं प्रसंस्करण इकाइयों से यह भी पूछा गया है कि उनके पास खाद्य जांच प्रयोगशाला और इसके संचालन के लिए योग्य कर्मचारी हैं या नहीं, तब न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी.पंत तथा न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ की सर्वोच्च न्यायायाल की अवकाश पीठ ने जेकेटीएमएफ की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई।
उच्च न्यायालय ने खाद्य व्यापार में शामिल इकाइयों से कहा था कि उन्हें खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का पालन करना होगा।
जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल, 2016 को एक स्वत: स्फूर्त जनहित याचिका पर आदेश देते हुए खाद्य पदार्थ निर्माण/प्रसंस्करण इकाइयों को रजिस्ट्रार के समक्ष एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थ निर्माण/प्रसंस्करण इकाइयां उपभोक्ताओं को खाद्य वस्तुएं उपलब्ध कराएंगी और अगर प्रथम दृष्टया यह पाया जाता है कि खाद्य वस्तुओं में मिलावट है, तो उनकी निर्माण इकाई को सील कर दिया जाएगा।
फेडरेशन की तरफ से न्यायालय में पेश हुए वकील जयंत भूषण ने कहा कि जेकेटीएमएफ के सदस्य अल्पकालिक कारोबारी हैं और वे बेकरी, मिठाई की दुकान तथा पेटी के निर्माण कार्य में संलग्न हैं। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय का निर्देश खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।
भूषण से न्यायालय से कहा कि एफएसएस अधिनियम के प्रावधानों के तहत पेटी निर्माता जो किसी खाद्य पदार्थ का निर्माण करते हैं या उसकी बिक्री किसी पेटी खुदरा विक्रेता, हॉकर या ऐसे अस्थायी दुकानदारों को करते हैं, उनका पंजीकृत होना जरूरी है न कि उन्हें लाइसेंस की जरूरत है।
पीठ से कहा गया कि एफएसएसए की धारा 32 के तहत यदि खाद्य सामग्री विक्रेता एफएसएसए के नियमों के पालन में नाकाम पाया जाता है, तो उसे खाद्य सामग्री में सुधार का नोटिस दिया जाना चाहिए।
भूषण ने कहा कि एफएसएसए की धारा 33 के तहत खाद्य व्यवसाय से जुड़ी सामग्री या परिसर को तब तक बंद नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसे अपना पक्ष रखने को एक मौका नहीं दिया जाए।
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