जिगिशा हत्याकांड में 3 को दोषी करार : दिल्ली न्यायालय

नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली की अदालत ने गुरुवार को आईटी कर्मचारी जिगिशा घोष हत्या मामले में तीन लोगों को दोषी करार दिया है। जिगिशा की 2009 में हत्या कर दी गई थी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत सिंह मलिक को मार्च 2009 में 28 वर्षीया जिगिशा के अपहरण और हत्या मामले में दोषी करार दिया है।

अदालत का कहना है कि अभियोजन पक्ष ने तीनों अभियुक्तों के खिलाफ साक्ष्यों को सही बात किया है।

जिगिशा के माता-पिता ने आईएएनएस को बताया कि वे अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं और न्याय हो चुका है।

अभियोजन पक्ष ने मामले में अपनी ओर से 58 गवाहों को पेश किया।

अदालत ने सजा पर दलील सुनाने के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की है और न्यायिक हिरासत के दौरान तीनों आरोपियों के व्यवहार के संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है।

हेविट एसोसिएट प्राइवेट लि. में ऑपरेशन मैनेजर के रूप में कार्यरत जिगिशा की 18 मार्च, 2009 को अपहरण कर हत्या कर दी गई थी।

ऑफिस कैब ने जिगिशा को सुबह लगभग चार बजे दिल्ली के वसंत विहार में उसके घर के पास छोड़ा और वहीं से उसका अपहरण कर लिया गया।

उसका शव 20 मार्च, 2009 को हरियाणा के सूरजकुंड के पास से बरामद किया गया।

इसके बाद पुलिस ने इस मामले में कपूर, शुक्ला और मलिक को गिरफ्तार किया।

पुलिस के मुताबिक, हत्या में इस्तेमाल हथियार से पत्रकार सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड की गुत्थी सुलझने में मदद मिली, जिसकी 30 सितंबर, 2008 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिस वक्त सौम्या को गोली मारी गई, वह अपनी कार से ऑफिस से घर लौट रही थी।

पुलिस का कहना है कि पत्रकार की हत्या में तीन लोग शामिल थे और इसका मकसद लूट था।

आरोपियों ने सरोजनी नगर बाजार से महंगे चश्मे, घड़ी और जूते खरीदने के लिए जिगिशा के एटीएम कार्ड का इस्तेमाल किया था।

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