आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों से यह बात सामने आती है कि पेंशन को तत्कालीन विभागीय सचिव अनीता मेश्राम और मंत्री अरुण कुमारी कोरी द्वारा 20 हजार रुपये मासिक पेंशन की संस्तुति की गई थी, जिसको पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे 50 हजार रुपये प्रति माह करने के आदेश दिए, जो उनकी ओर से उनके सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा ने आदेशित किया।
इसी प्रकार पत्रावली से यह बात भी सामने आती है कि अनीता मेश्राम और मंत्री कोरी ने पेंशन के लिए आवेदनपत्र का जो प्रारूप बनाया था, उसमें यह घोषणा की थी कि पेंशन पाने वाले व्यक्ति के पास पर्याप्त आय का साधन नहीं है और उसे जीवनयापन के लिए पेंशन की जरूरत है।
अखिलेश यादव ने एक बार फिर से इन दोनों शर्तो को हटाने के निर्देश दिए, जिसके कारण साधन-संपन्न व्यक्ति भी यह पेंशन पा सकता है। नूतन ने कहा कि ये सूचनाएं नेताओं द्वारा सरकारी धन के प्रति पूर्ण लापरवाही की बात को उजागर करती है।
dharmpath.com dharmpath