दलितों की पिटाई के विरोध में गुजराती लेखक ने लौटाया पुरस्कार

अहमदाबाद, 28 जुलाई (आईएएनएस)। गुजराती लेखक अमृतलात मकवाना ने ऊंची जाति के गौरक्षकों द्वारा चार दलित युवकों की कोड़े से पिटाई के विरोध में राज्य सरकार से मिला एक पुरस्कार लौटा दिया है।

दलित लेखक मकवाना (44) को उनकी कृति ‘खारापात नू दलित लोक साहित्य’ के लिए वर्ष 2012-2013 का देसी जीवन श्रेष्ठ दलित साहित्य कृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पुरस्कार में 25 हजार रुपये और एक प्रशस्तिपत्र शामिल था।

मकवाना बुधवार को चुपचाप अहमदाबाद जिलाधिकारी कार्यालय गए और पुरस्कार उनके सामने रखकर लौट आए।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मैंने प्रशासन को यह कहते हुए एक संक्षिप्त पत्र लिखा है कि मैं दलित युवकों के साथ हुए बर्बरतापूर्ण व्यवहार से दुखी होकर इस पुरस्कार को लौटा रहा हूं।”

उन्होंने वह पत्र मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को संबोधित करते हुए लिखा है।

सुरेंद्रनगर जिले के वाधवान शहर में रहने वाले माकवाना ने कहा कि राज्य दलितों पर हमले एक नियमित घटना हो गई है और सरकार ने दलितों को न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की है।

उन्होंने कहा, गिर-सोमनाथ जिले के मोटा समधियाला जिले में हुआ हमला वीभत्स एवं क्रूर था। इसने मुझे पूरी तरह हिलाकर रख दिया।

चर्मकार जाति के चार युवकों को एक मृत गाय की खाल उतारते देख गौरक्षक दल ने चारों को जायलो कार से बांधकर, उनके कपड़े उतारकर उनकी पीठ पर अम्युमीनियम के कोड़े बरसाए थे और औरों को सबक सिखाने के लिए इस बर्बरतापूर्ण कृत्य का वीडियो बनाकर इंटरनेट पर डाल दिया था। इस वीडियो के वायरल होने पर पिछले हफ्ते संसद से सड़क तक हंगामा हुआ था।

इससे पहले, पिछले साल सितंबर में उत्तर प्रदेश के दादरी में बहुसंख्यकों ने बकरीद पर्व के दिन अल्पसंख्यक समुदाय के अखलाक नामक एक बुजुर्ग के घर पर हमला कर सिलाई मशीन से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी थी और उसके बेटे को अधमरा कर दिया गया था। उस पर गोमांस खाने का आरोप लगाया गया था। इस घटना और जुल्मोसितम की कई घटनाओं से आहत देश के लगभग 60 साहित्यकारों व कलाकारों ने अपने पुरस्कार लौटा दिए थे। ऐसे कृत्यों को राष्ट्रपति ने ‘असहिष्णुता’ नाम दिया था।

बाद में ‘असहिष्णुता’ शब्द सुनते ही आरएसएस-भाजपा के लोग असहिष्णुता होने लगे थे और उन्होंने इस मुद्दे को यह कहकर दूसरी तरफ घुमा दिया कि ‘यह कहना गलत है कि देश में सहिष्णुता नहीं है।’ वाकई, देश में सहिष्णुता है, वरना जिनको अमेरिका ने जिस कारण से वीजा देने से इनकार कर दिया था, वह भारत का प्रधानमंत्री बन पाते क्या?

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