चेन्नई, 10 सितम्बर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि भारत जैसी विकसित हो रही अर्थव्यवस्था में ऋण विस्तार की जरूरत है। कुल मिलाकर, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ने, विशेष रूप से आर्थिक संकट के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने बैंकरों से कहा कि उन्हें एनपीए की स्थिति को लेकर विवेकपूर्ण बने रहना चाहिए।
राष्ट्रपति ने करुर व्यास बैंक के शताब्दी समारोह में बैंकरों से कहा कि जिन्होंने आपमें भरोसा जताया है, उनके धन की रक्षा करना आपकी पावन जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने बैंकों की अलाभकारी परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी तथा मुनाफे में हो रही कमी की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि अनुसूचित व्यावसायिक बैंकों का सकल अग्रिमों के अलाभकारी अग्रिमों की मात्रा मार्च, 2015 के 10.90 प्रतिशत से बढ़कर मार्च, 2016 में 11.40 प्रतिशत हो गई है।
सभी अनुसूचित व्यावसायिक बैंकों द्वारा किए गए प्रावधान मार्च, 2015 के 73,887 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च, 2016 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान 1,70,630 करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं। इसके फलस्वरूप व्यावसायिक बैंकों द्वारा ऋण संवितरण के लिए उपलब्ध संसाधन प्रभावित हुए हैं और यह वांछनीय स्थिति में नहीं है।
राष्ट्रपति ने बैंकरों से कहा कि उन्हें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि वे जमाकर्ताओं के धन के ट्रस्टी हैं। यह उनकी पावन जिम्मेदारी है कि वे उनके धन की रक्षा करें जिन्होंने उनमें भरोसा जताया है।
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