नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हाराव ने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत सारे सुधार शुरू किए थे, लेकिन ‘कांग्रेस पार्टी पर उनकी पकड़ नहीं’ थी। तत्कालीन खाद्यमंत्री तरुण गोगोई ने अयोध्या विवादित ढांचा विध्वंस मामले को लेकर प्रधानमंत्री के रुख की आलोचना करते हुए पत्र लिखा था, लेकिन उन्हें उसका जवाब नहीं मिला था।
असम के मुख्यमंत्री गोगोई अपनी किताब ‘टर्नअराउंड -लीडिंग असम फ्रॉम द फ्रंट’ में यह याद करते हैं कि 1992 में विवादित ढांचा ढहने के समय प्रधानमंत्री राव ने जिस तरह का रुख अपनाया, वह ‘उचित नहीं’ था।
वर्ष 2001 से ही असम के मुख्यमंत्री पद पर बरकरार गोगोई लिखते हैं, “नरसिम्हा राव एक आधुनिक व्यक्ति थे और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत सारे सुधार शुरू किए। वह अपने मंत्रियों के काम में हस्तक्षेप नहीं करते थे। खाद्यमंत्री के रूप में मैंने अधिकांश फैसले खुद लिए।”
गोगोई इस पुस्तक में लिखते हैं, “हालांकि राव की अपनी पार्टी पर पकड़ नहीं थी। मैं महसूस करता हूं कि जिस तरह वह विवादित ढांचा विध्वंस से निपटे वह उचित नहीं था। मंत्री के रूप में सभी परंपराएं तोड़ते हुए मैंने उन्हें पत्र लिखा था कि उन्हें ऐसा होने नहीं देना चाहिए था। उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को विश्वास में लेना चाहिए था।”
गोगोई कहते हैं, “जिस तरह से उस विध्वंस ने अल्पसंख्यकों को हमलोगों से अलग कर दिया, उसे लेकर मेरा रुख बहुत आलोचनात्मक था। हालांकि, उन्होंने मेरे पत्र का जवाब नहीं था।”
गोगोई यह भी याद करते हैं कि राव सरकार में खाद्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनी कोका-कोला और पेप्सी को भारत में प्रवेश दिया था।
गोगोई ने लिखा है, “हमारी सरकार ने विदेशी निवेश के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को खोलने का निर्णय लिया था। मैंने भारत में कोका-कोला और पेप्सी को प्रवेश देने का निर्णय लिया। मैं समझता हूं कि वह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह बताने का एक अच्छा अवसर था कि भारतीय अर्थव्यवस्था खुल रही है और भारत विश्व व्यापार के साथ चलना चाहता है।”
वह लिखते हैं, “विपक्ष इसकी तीव्र आलोचना कर रहा था, लेकिन मैं अपने निर्णय पर सख्ती से अड़ा रहा। वर्ष 1993 में मुझे केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय में भेजा गया, जहां से मुझे अंतर्राष्ट्रीय स्वर पर चीजों को देखने समझने का बहुत अधिक मौका मिला।”
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