कोलकाता, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। बंगाल की खाड़ी में तटरक्षक बल ने गश्त बढ़ा दी है और भारत की पश्चिमी सीमा पर मौजूदा तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
यह समीक्षा गुरुवार को संपन्न दो दिवसीय ‘डिस्ट्रीक्ट कमांडर्स एंड वर्क्स कॉफ्रेंस’ में की गई।
इस सम्मेलन का आयोजन तटरक्षक बल के क्षेत्रीय मुख्यालय (पूर्वोत्तर) ने किया था। इसमें पश्चिम बंगाल और ओडिशा के क्षेत्रीय कमांडर महानिरीक्षक के. आर. नौटियाल ने तटीय सुरक्षा तंत्र की समीक्षा की। उन्होंने भारत की पश्चिमी सीमा पर जारी संकट की स्थिति को देखते हुए उत्पन्न होने वाले किसी भी संभावित हालात का जवाब देने के लिए जिला कमांडरों को पूरी तरह से चौकस रहने का निर्देश दिया।
सम्मेलन में दोनों राज्यों जमीन और हवाई माध्यम से भी पूरी तरह से गश्त बढ़ाने का निर्णय लिया गया, ताकि के समुद्री तटों को अच्छी तरह से नजर रखी जा सके।
हल्दिया और पारादीप तटरक्षक जिला मुख्यालयों के कमांडरों और गोपालपुर, फ्रेजरगंज, भुवनेश्वर और कोलकाता के कोस्ट गार्ड एयर स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसरों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।
इस सम्मेलन में संचालन, जहाजी बेड़े के रखरखाव, कार्मिक एवं प्रशासन जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यालय ने पिछले एक साल में 1256 जहाजों का रखरखाव किया है, जो प्रति दिन तीन गश्ती जहाज के बराबर है।
कोलकाता और भुवनेश्वर स्थित एयर स्क्वाड्रन ने तटों की निगरानी के लिए वर्ष में 3243 घंटे की उड़ान भरी है। यह प्रतिदिन नौ घंटे से भी अधिक का है। समुद्र में फंसे 250 से भी अधिक लोगों की जान बचाई गई है। अगस्त 2016 में पहली बार इंडो-बांग्ला संयुक्त तलाशी एवं बचाव अभियान चलाया गया था।
बीते एक वर्ष में राज्य की सरकारी एवं कुछ अन्य एजेंसियों के साथ दो तटीय सुरक्षा अभ्यास भी किए गए, ताकि तटीय सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से क्रियाशील रखा जाए।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा के मछुआरों के छोटे-छोटे गांवों में मछुआरों को समुद्री सुरक्षा और उन पर लागू होने वाले विभिन्न कानूनों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए सामुदायिक मेल-मिलाप के 65 कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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