नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। मधुमेह पर काबू पाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ाने की जरूरत है। ‘नैटहेल्थ’ ने शुक्रवार को कहा कि देश में प्रभावी हेल्थकेयर सिस्टम के निर्माण के लिए जरूरी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
विश्व स्वास्थ सप्ताह के मौके पर छोटे और मध्यम अस्पतालों की प्रतिनिधि संस्था ‘नैटहेल्थ’ के प्रेसीडेंट राहुल खोसला ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, “हमें मधुमेह, हृदयरोग व कैंसर को नियंत्रित करने के लिए वर्तमान कार्यक्रमों को और भी बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए एकीकृत स्क्रीनिंग, रोकथाम, उपचार और फॉलोअप के तौर पर कदम उठाने चाहिए, जो निजी-निजी तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत हो। इसमें स्वास्थ्य उद्योग के फार्मास्यूटिकल क्षेत्र, तकनीक, बीमा इत्यादि क्षेत्रों को भी जोड़ने की जरूरत है।”
नैटहेल्थ के महासचिव अंजन बोस ने कहा, “ताजा बजट में सरकार द्वारा की गईं कई घोषणाएं सराहनीय हैं। राष्ट्रीय डायलिसिस सेवा कार्यक्रम एक स्वागतयोग्य कदम है। हेल्थकेयर सेक्टर पर फोकस के साथ सामाजिक क्षेत्र में खर्च में बढ़ोतरी से सभी तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित होगी। यह सरकार के ‘बेहतर और स्वस्थ भारत’ कार्यक्रम को भी बढ़ावा देगा।”
नैटहेल्थ की आरोग्य भारत रिपोर्ट में बताया गया है कि मधुमेह के मामले में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है तथा एक अनुमान के मुताबिक साल 2030 तक मरीजों की संख्या 10 करोड़ तक पहुंच जाएगी। भारत में 3.8 करोड़ शहरी आबादी डायबिटिक है तथा 8 करोड़ से ज्यादा लोग प्री-डायबिटिक हैं, विश्व में हर पांचवा डायबिटिक व्यक्ति भारतीय है।
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