इंफाल, 3 जून (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में राजनेताओं का एक दल शुक्रवार को नई दिल्ली के लिए रवाना हुआ।
यह प्रतिनिधिनिधमंडल राज्य में बाहरी लोगों के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए गत साल 31 अगस्त को राज्य विधानसभा से पारित तीन विधेयकों को मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करेगा।
इन विधेयकों को जनजाति विरोधी बताकर इनका विरोध भी हो रहा है।
मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री और अन्य लोगों से मिलने का समय मिलने तक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में डेरा जमाए रखेगा।”
केंद्र सरकार इन तीन विधेयकों को मंजूरी देने के पक्ष में नहीं रही है, क्योंकि जनजातीय समुदाय के लोगों ने इन विवादास्पद विधेयकों का विरोध किया है।
दल में भाजपा अध्यक्ष खेत्रिमायुम भबनंदा की अनुपस्थिति सबको ध्यान खींच रही थी। उनकी जगह पार्टी ने अपने प्रवक्ता और मीडिया स्मन्वयक को भेजा है।
दो वरिष्ठ राजनीतिक नेता मोइरांगथेम नारा और ओकराम ज्वॉय पहले से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
मणिपुर पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष एन. सोवाकिरण ने कहा, “राजनीतिक नेताओं का दल केंद्रीय नेतृत्व को बताएगा कि बाहरी लोगों के राज्य में प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए कोई तंत्र नहीं है। यहां तक कि विदेशी भी मणिपुर में आते हैं और यहां बस जाते हैं। जल्द ही मणिपुर बाहरी लोगों से भर जाएगा।”
आंतरिक परमिट पर बनी संयुक्त समिति के संयोजक खोमद्राम रतन की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वालों को 5 लाख रुपये इनाम देने की पुलिस की घोषणा के बारे में सोवाकिरण ने कहा, “यह बीमार मस्तिष्क की कार्रवाई है। पुलिस की कार्रवाई फेसबुक तस्वीर पर आधारित है जो बताती है कि रतन प्रतिबंधित संगठन के सदस्य हैं। ऐसे उदाहरण हैं कि फेसबुक की तस्वीरें और सूचनाएं सही नहीं होती हैं। यह अच्छा होगा, अगर पुलिस पीछे हट जाती है।”
रतन ने स्पष्ट किया है कि फेसबुक की तस्वीर फर्जी है।
उधर, विधेयकों को कानून बनने से रोकने के लिए मणिपुर की जनजातियों ने आन्दोलनों की एक श्रृंखला की घोषणा की है।
जबकि, विधेयकों को कानून बनाने के लिए भी मणिपुर में आन्दोलन हुए हैं। महिलाएं लगातार सड़कें जाम कर धरना प्रदर्शन कर रही हैं जबकि छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
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