सुन्नी बोर्ड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सैयद जुनैद अशरफ किछौछवी ने कहा कि मुसलमान शरई मामले में किसी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा। इस्लामिक शरीअत किसी इंसान का नहीं बल्कि अल्लाह का बनाया हुआ है और अल्लाह के बनाए हुए कानून में कोई तब्दीली नहीं हो सकती। क्योंकि अल्लाह से बड़ी कोई अदालत नहीं है।
किछौछवी ने कहा कि निकाह के वक्त औरत को पहले कुबूल करने का अख्तियार देता है। ऐसे में अगर औरत कुबूल न करे तो निकाह संभव नहीं है। उसी तरह तलाक का अधिकार इस्लाम ने मर्द को दिया। हां अगर औरत अपने शौहर से साथ तलाक लेना चाहे तो शर्तो के साथ यह रास्ता रखा है। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने औरत को जोड़ने का काम दिया है।
अल्लाह को जायज कामों में सबसे ज्यादा नापसंद तलाक है। इसका मतलब यह नहीं कि तलाक का हक ही इंसानों से छीन लिया जाए। दरअसल पति-पत्नी में अगर किसी भी तरीके से निबाह नहीं हो पा रहा है तो वह अलग होकर अपनी जिंदगी का सफर तय कर सकते हैं।
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