भोपाल, 28 जुलाई (आईएएनएस)। नर्मदा बचाओ आंदोलन की अगुवा मेधा पाटकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आकाशवाणी के जरिए देशवासियों से ‘मन की बात’ पर तीखा कटाक्ष किया है, और कहा है कि मोदी ‘मन’ की नहीं ‘मनमानी बात’ करते हैं।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि सरदार सरोवर बांध के प्रभावितों को लेकर केंद्र व राज्य सरकार गंभीर नहीं है।
उच्च व सर्वोच्च न्यायालयों के निर्देशों के बाद भी बांध की ऊंचाई बढ़ाई गई है। इससे प्रभावितों का आंकड़ा बढ़ रहा है। इसके बाद भी सरकारें विस्थापितों और प्रभावितों के मामले में गंभीर नहीं है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से पहले इस देश में हुए प्रधानमंत्रियों ने कई दफा नर्मदा आंदोलन से जुड़े लोगों से सीधे संवाद किया, मगर मोदी सीधे संवाद करने को तैयार नहीं हैं।
इसके लिए कई बार उनसे संपर्क किया गया, उसके बाद भी वे सीधे संवाद तो दूर, पत्र का जवाब भी केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के विभाग के जरिए दे रहे हैं।
मेधा ने आगे कहा कि मोदी मन की बात करते हैं, वास्तविकता तो यह है कि वे मनमानी बात के आदी हो चुके हैं। वे सरदार सरोवर के प्रभावितों का दर्द सुनना ही नहीं चाहते।
नर्मदा बचाओ आंदोलन के पत्र का केंद्र सरकार की ओर से जो जवाब दिया गया है, उसमें दर्ज किए गए आंकड़ों को भी उन्होंने सवाल के कटघरे में खड़ा किया।
मेधा का आरोप है कि केंद्र की ओर से जो जवाब उनके पास आया है, वह सालों पूर्व लिखे गए पत्र के अंशों को कट एंड पेस्ट करके भेज दिया गया है। यह कोई नया पत्र नहीं है।
इससे जाहिर होता है कि व्यवस्था इस मानवीय समस्या के प्रति कितनी असंवेदनशील है।
उन्होंने केंद्र सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरदार सरोवर बांध के बैक वाटर से 30 वर्ष पूर्व प्रभावित होने वाले परिवारों में से 15,909 परिवारों को इससे अलग कर दिया गया है, अर्थात डूब से अप्रभावित करार दे दिया और पुनर्वास के लिए अपात्र मान लिया।
सवाल उठता है कि बांध का जलस्तर बढ़ा तो बैक वाटर के प्रभावितों की संख्या कम कैसे हो गई।
मेधा का आरोप है कि केंद्र सरकार ने जो जवाब भेजा है वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से 2000 में बनाए गए एक्शन प्लान को ही 2016 में वर्तमान एक्शन प्लान के रूप में पेश किया गया है। इसमें बांध की ऊंचाई 122 मीटर और वर्ष 2004 तक 138.68 मीटर करने की बात कही गई है।
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