अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस के जवान अक्सर चार पहिया वाहन या फिर मोटरसाइकिल पर ही नजर आते हैं, मगर शहर की कुछ गली इतनी तंग है कि वहां पर चार पहिया का पहुंचना तो दूर, मोटरसाइकिल का निकलना मुश्किल भरा रहता है। ऐसे में इन गलियों में अपराधियों को छिपने व भागने का पूरा मौका मिलता है।
लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जनता को पुलिस की मौजूदगी नजर आएगी। गली-मोहल्लों में जमघट लगाकर खड़े होने वाले मजनुंओं पर शिकंजा कसा जा सकेगा। इसी मंशा के अनुरूप सिपाहियों को ‘साइकिल’ देने की योजना बनाई जा रही है।
एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि साइकिल के जरिए गश्त होने से पुलिस को चप्पे-चप्पे की जानकारी मिल सकेगी और जनता को पुलिस की मौजूदगी नजर आएगी।
एक सच्चाई यह भी है कि सिपाही भले ही बाइक पर दौड़ते हैं, लेकिन भत्ता उन्हें साइकिल का मिलता है। यानी पेट्रोल का पैसा उन्हें वेतन में जोड़कर नहीं मिलता। आज भी सिपाहियों को साइकिल भत्ता मिलता है।
हां, पुलिस लाइन से गश्त के लिए जो बाइक मिलती है, उसका पेट्रोल जरूर पुलिस लाइन की तरफ से दिया जाता है। पहले प्रत्येक बाइक को प्रतिदिन एक लीटर पेट्रोल ही मिलता था, अब दो लीटर मिलने लगा है।
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