राज्यसभा की सदस्यता से इनकार राजनीतिक वजहों से नहीं : पांड्या

नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। मनोनीत किए जाने के बाद राज्यसभा का सदस्य बनने से इनकार करने वाले प्रणव पांड्या ने कहा है कि यह एक गैर राजनीतिक फैसला था और उनके मन में संसद के उच्च सदन के प्रति बहुत सम्मान है।

नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। मनोनीत किए जाने के बाद राज्यसभा का सदस्य बनने से इनकार करने वाले प्रणव पांड्या ने कहा है कि यह एक गैर राजनीतिक फैसला था और उनके मन में संसद के उच्च सदन के प्रति बहुत सम्मान है।

पांड्या ‘ऑल वर्ल्ड गायत्री परिवार’ के मुखिया हैं। वह कहते हैं कि ‘राज्यसभा का सदस्य बनने के विचार को लेकर वह सहज नहीं थे।’ लेकिन, शुरुआत में उन्होंने यह प्रस्ताव इसलिए स्वीकार कर लिया था क्योंकि उनका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुराना साथ रहा है।

पांड्या ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, “मैं एक गैर राजनीतिक व्यक्ति हूं। मेरे परिवार में कोई भी व्यक्ति राजनीति की चर्चा नहीं करता। मैं सदन का बहुत सम्मान करता हूं, लेकिन हमें किसी भी हाल में वहां संकीर्ण राजनीति पर चर्चा नहीं करनी चाहिए।”

राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने शुक्रवार को पांड्या का इस्तीफा स्वीकार करने की घोषणा की।

जब सदन की बैठक शुरू हुई तो अंसारी ने कहा कि उन्हें नौ मई को इस बारे में पांड्या का पत्र मिला था।

सभापति ने कहा, “मैंने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है जो 11 मई 2016 से प्रभावी होगा।”

पांड्या ने इन अफवाहों को भी खारिज किया कि उन्होंने राज्यसभा सदस्यता का प्रस्ताव इस वजह से स्वीकार नहीं किया क्योंकि वह कांग्रेस के करीबी हैं।

उन्होंने कहा, “यह सत्य नहीं है। मुझे यह प्रस्ताव विनम्र भाव से अस्वीकार करना था क्योंकि मैंने सोचा कि मैं बाहर रहकर जनता की बेहतर सेवा कर सकता हूं।”

पांड्या ने कहा कि उनके ससुर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बहुत करीब थे। लेकिन, इसका यह मतलब नहीं कि वह कांग्रेस के करीबी हैं।

पांड्या ने यह भी कहा कि इस प्रस्ताव को नहीं कहना असहज करने वाला था लेकिन इससे बचा नहीं जा सकता था।

यह पूछने पर कि उच्च सदन में बदलाव के बारे में वह क्या सोचते हैं? पांड्या ने कहा कि वहां किसी भी हाल में शोर नहीं होना चाहिए और हर हाल में समझ वाली बात होनी चाहिए।

जिस तरह से सदन में चर्चा होती है या नहीं होती है, उससे अपने को अलग करते हुए उन्होंने कहा कि सदस्यों को हमेशा दिमाग में लोगों के हित की बात रखनी चाहिए और क्षुद्र राजनीति में नहीं लिप्त होना चाहिए।

उन्होंने कहा, उच्च सदन ‘हाउस ऑफ लार्ड्स’ की तरह है। बहुत से महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिनका सामना देश कर रहा है। उन्हें हर हाल में उनकी चर्चा करनी चाहिए और उनका समाधान निकालना चाहिए।

पांड्या ने कहा, “सूखे के कारण देश के बहुत सारे इलाकों में संकट की स्थिति है। इस पर सांसदों के बीच गंभीर चर्चा होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “मैं उन्हें पूरी तरह बदल देना चाहता हूं। उनकी बुद्धि को बदल देना चाहता हूं।” भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसे एकजुट होकर काम करना चाहिए।

नरेंद्र मोदी सरकार की संस्तुति पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पांड्या को गत चार मई को मनोनीत किया था। मेडिसिन में एमडी डॉक्टर पांड्या ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि संसद के उच्च सदन का माहौल उनके लिए हितकर नहीं है।

राष्ट्रपति केंद्र सरकार की सलाह पर साहित्य, विज्ञान, खेल, कला एवं समाज सेवा जैसे क्षेत्रों के 12 लोगों को राज्यसभा के लिए मनोनीत करते हैं और आम तौर पर इन लोगों का कार्यकाल छह साल होता है।

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