सिंहस्थ कुंभ : पीढ़ियां बदलीं, आस्था बरकरार

उज्जैन, 19 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ कुंभ में आस्था के रंग देखने को मिल रहे हैं। यहां आने वालों पर उम्र का भी असर नजर नहीं आता। यही कारण है कि यहां ऐसे कई लोग पहुंच रहे हैं, जो चौथी या पांचवीं बार सिंहस्थ के दौरान क्षिप्रा नदी में स्नान कर रहे हैं। उन्होंने अपने दादा के साथ स्नान किया था, तो अब नातियों के साथ डुबकी लगा रहे हैं।

भारतीय संस्कृति में तिथि, त्योहार, पर्व, मेले आदि सभ्यता एवं संस्कृति के एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक के संवाहक माने जाते हैं। इतना ही नहीं इनके आयोजन से सांस्कृतिक परम्पराएं जीवन्त हो उठती हैं। यही बात उज्जैन के सिंहस्थ में दिख रही है।

उज्जैन सिंहस्थ में आए शाजापुर जिले के ग्राम पोलाय कलां के हीरालाल चौधरी एवं तुलसीराम मण्डलोई की तरह अनेक श्रद्घालु ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी पूर्व पीढ़ियों यानी अपने दादा जी के साथ 1968 में पहला कुंभ स्नान किया था।

आज उन्होंने अपने नातियों के साथ पांचवीं बार सिंहस्थ महाकुंभ में रामघाट पर डुबकी लगाई।

चौधरी का कहना है कि तब के और आज के महाकुंभ में काफी बदलाव आ चुका है। इस बार के सिंहस्थ की व्यवस्थाएं बेहतर हैं। उनके पोलाय कलां नगर की आबादी 16 हजार के करीब है, जिसमें से करीब 10 हजार लोगों ने विभिन्न पर्वो पर स्नान किया। लोगों के आने का क्रम अब भी जारी है।

इसी तरह इंदौर के तिरुपति नगर से आई 84 वर्षीय कांताबाई नागर की कमर झुकी हुई है। वे अपने 100 वर्षीय पति राम चन्दर नागर के साथ यहां आई हैं।

उन्होंने कहा, “देश की संस्कृति एवं परंपराओं पर मेरी बहुत अधिक आस्था है। मेरी 64 वर्षीया बहू निर्मला नागर एवं बेटा बाबूलाल नागर भी मेरी भावनाओं की कद्र करते हैं।”

वह चौथे कुंभ स्नान का पुण्य प्राप्त करने के लिए आई हैं।

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