कोलकाता, 22 नवंबर (आईएएनएस)। मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ का कहना है कि भारत कठिन दौर से गुजर रहा है, जहां ‘पहले हाशिये पर रहने वाले’ (फ्रिंज) कट्टरंपथी समूह अब मुख्यधारा बन चुके हैं। ‘सत्ता में बैठे फासीवादियों’ की मिलीभगत से वही अब ‘शो’ को चला रहे हैं।
कोलकाता, 22 नवंबर (आईएएनएस)। मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ का कहना है कि भारत कठिन दौर से गुजर रहा है, जहां ‘पहले हाशिये पर रहने वाले’ (फ्रिंज) कट्टरंपथी समूह अब मुख्यधारा बन चुके हैं। ‘सत्ता में बैठे फासीवादियों’ की मिलीभगत से वही अब ‘शो’ को चला रहे हैं।
2002 के गुजरात दंगों के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्षरत तीस्ता (53) को बिहार चुनाव के नतीजों में आशा की एक किरण नजर आती है।
तीस्ता ने आईएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, “मोदी सरकार की प्रमुख खासियतों में से एक यह भी है कि अब हाशिये पर पड़े तत्व मुख्यधारा बन चुके हैं। उनके पास संसद में लोग हैं, मंत्री हैं, महत्वपूर्ण जगहों पर बैठे लोग हैं, जो पूरी बेशर्मी से धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं।”
तीस्ता ने कहा, “जिन्हें हम पहले ‘फ्रिंज’ कहते थे, वे ही अब सब कुछ चला रहे हैं। राजग तो बस मुखौटा है। यह आरएसएस है जो सरकार को नियंत्रित कर रहा है और ये विहिप और बजरंग दल हैं जो कामकाज संभाल रहे हैं।”
कई मुद्दों पर मोदी की चुप्पी पर तीस्ता ने कहा कि यह चुप्पी ‘बिना बोले दी गई सहमति’ है।
उन्होंने आरोप लगाया, “सवाल मोदी की चुप्पी का नहीं है। सवाल उनके निशाना लगाकर की गई हिंसा के संदेशों का है और उस आश्वासन का है कि ऐसा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।”
तीस्ता ने कहा, “दादरी में आदमी की हत्या केंद्र द्वारा की जा रही नफरत आधारित राजनीति का प्रमाण है। हो सकता है कि अभी सत्ता में फासीवाद न आया हो लेकिन सत्ता के महत्वपूर्ण जगहों पर फासीवादी ताकतें काबिज हैं। इसीलिए धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य को बहुत बड़ा खतरा है।”
उन्होंने कहा कि इस सरकार के तहत दो खतरे देश के सामने हैं। एक तो अति दक्षिणपंथी आर्थिक नीतियों का और दूसरा अति दक्षिणपंथी सामाजिक-राजनैतिक विचारों का।
उन्होंने बिहार के नतीजों को आशा की किरण बताया और कहा कि यह नतीजा नहीं बल्कि आंदोलन है। इसने सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों से लड़ने का रास्ता दिखाया है।
उन्होंने कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से गुजरात दंगे के पीड़ितों की इंसाफ की लड़ाई मुश्किल हुई है लेकिन लड़ाई जारी रहेगी।
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