बड़वानी, 31 जुलाई (आईएएनएस)। नर्मदा नदी को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर द्वारा की गई कथित टिप्पणी से बवाल मच गया है। नर्मदा भक्तों ने मेधा के खिलाफ पुलिस से कार्रवाई की मांग की है, वहीं मेधा के समर्थकों ने बयान जारी कर सफाई दी है।
ज्ञात हो कि मेधा पाटकर ने राजधानी भोपाल में पिछले दिनों संवाददाताओं से चर्चा के दौरान औद्योगिक घरानों द्वारा किए जा रहे नर्मदा नदी के दोहन और उत्खनन को लेकर रोष जाहिर किया था और सरकारों पर हमला बोला था।
उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि नर्मदा को ‘वेश्या’ बना दिया गया है और कंपनियां उसका उपभोग कर रही हैं।
मेधा के इस कथित बयान पर मां नर्मदा भक्त मंडल ने सख्त आपत्ति दर्ज कराते हुए मेधा पाटकर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और रविवार को पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपा।
मां नर्मदा भक्त मंडल ने मेधा के कथित बयान पर घोर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि मेधा पाटकर द्वारा नर्मदा को इस तरह की उपमा दिया जाना निंदनीय है।
पुलिस अधीक्षक के नाम कोतवाली थाने में दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि नर्मदा करोड़ों लोगों के लिए पूजनीय है और इस तरह की उपमा ने उनकी आस्था को चोट पहुंचाया है। मंडल की ओर से दिए गए ज्ञापन में पुलिस अधीक्षक से मेधा के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
वहीं दूसरी ओर, नर्मदा समर्थक समूह की ओर से जारी बयान में सफाई दी गई है। नर्मदा समर्थक समूह के राजकुमार सिन्हा व अमूल्य निधि ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा है कि नर्मदा बचाओ आंदोलन समेत अनेक सामाजिक समूह और संवेदनशील नागरिक नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की लूट तथा अन्यायपूर्ण, बिना पुनर्वास विस्थापन के खिलाफ लामबंद हुए हैं, जिससे शोषकों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
जिनके हित प्रभावित हो रहे हैं, वे नर्मदा तथा अन्य नदियों के संरक्षण के अभियानों को बदनाम करने में लगे हुए हैं।
नर्मदा समर्थक समूह की ओर से जारी बयान में दावा किया गया है कि मेधा ने नर्मदा पर वेश्या बनने का आरोप नहीं लगाया था और न कभी लगा सकती है। उनका कहना था ‘जब नर्मदा सभी आमजनों के लिए माता या मातेसरी है तब उससे शासनकर्ता वेश्या जैसा व्यवहार करते हैं जो कि नर्मदा की कार्पोरेट्स के लिए हो रही लूट से जाहिर है।’
नर्मदा समर्थक समूह का आरोप है कि गुजरात की चार लाख हेक्टयर सिंचित जमीन को उद्योग के लिए आरक्षित किया जा रहा है। वहीं कोका कोला और टाटा जैसे उद्योगों के साथ पहले से ही 90 लाख लीटर प्रतिदिन पानी का अनुबंध कर लिया गया है।
नर्मदा की रेत निकाल कर नर्मदा तल को बुरी तरह से खोखला कर दिया गया है। इससे जलीय जीवों और वनस्पतियों की कई प्रजातियां खतरे में आ गई हैं।
dharmpath.com dharmpath