नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार, दिल्ली को एक संघ प्रशासित क्षेत्र बताने और इसके प्रशासन में उपराज्यपाल के निर्णय को अंतिम बताए जाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में सप्ताह भर के भीतर चुनौती देगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले को उठाया। न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति एन.वी. रमना की पीठ ने कहा कि न्यायालय दिल्ली सरकार की उस याचिका की सुनवाई करेगा, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली एक राज्य है और उपराज्यपाल मंत्रिमंडल की सलाह मानने को बाध्य हैं। सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका की भी साथ ही सुनवाई करेगा।
पीठ ने जयसिंह से कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देना बेहतर होगा और यह भी पूछा कि इस याचिका में उठाए गए कितने मुद्दों को उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में शामिल किया है?
अधिवक्ता जयसिंह ने जैसे ही न्यायालय से कहा कि दिल्ली सरकार एक सप्ताह के अंदर याचिका दायर करेगी, पीठ ने 29 अगस्त तक के लिए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
जब अधिवक्ता ने याचिका में उठाए गए विवाद पर सुनवाई करने पर जोर दिया तो महान्यायवादी मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि यह उचित नहीं है, क्योंकि दिल्ली सरकार ने एक संवैधानिक उपचार चुन लिया है, लिहाजा वह दूसरा रास्ते पर नहीं जा सकती है। वे समानान्तर सुनवाई की बात नहीं कर सकते हैं।
वाद की सुनवाई पर जब अधिवक्ता जयसिंह ने जोर दिया तो न्यायाधीश सीकरी ने उनसे कहा, “मुद्दे को दोहराने की क्या जरूरत है? आपको उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देनी है और इस न्यायालय को विचार करना है कि उच्च न्यायालय सही है या गलत।”
पीठ को दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने की बात कहते हुए जयसिंह ने कहा कि इस वाद में संविधान की व्याख्या से संबंधित मुद्दे उठाए गए हैं तथा एक प्राथमिक प्रश्न है कि यह वाद संविधान के अनुच्छेद 131 को आकर्षित करता है या नहीं।
संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र और राज्य के बीच विवाद उत्पन्न होने की स्थिति में कोई भी पक्ष शीर्ष अदालत की शरण में जा सकता है।
केजरीवाल सरकार संविधान के अनुच्छेद 239एए की व्याख्या के लिए शीर्ष अदालत की शरण में गई थी, जिसमें दिल्ली से संबंधित विशेष प्रावधान हैं। इस अनुच्छेद के तहत कहा गया है, “संधीय क्षेत्र दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहा जाएगा और अनुच्छेद 239 के तहत बहाल किए गए प्रशासक उप राज्यपाल के रूप में नामित होंगे।”
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