नालंदा विश्वविद्यालय सपना साकार होने जैसा : राष्ट्रपति (लीड-1)

बिहारशरीफ, 27 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यहां शनिवार को नए नालंदा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना उनके लिए एक सपना साकार होने जैसा है।

राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के पहले बैच के कुल 12 छात्रों को सम्मानित किया और उन्हें डिग्रियां प्रदान कीं। सम्मानित छात्रों में से दो को मुखर्जी ने स्वर्ण पदक प्रदान किए। इस मौके पर सभी छात्रों को प्रमाणपत्र भी दिए गए।

राष्ट्रपति ने कहा कि पुराने नालंदा विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक महत्व रहा है। बिहार में नालंदा और विक्रमशिला जैसे ऐतिहासिक महत्व के विश्वविद्यालय रहे हैं। वर्तमान नालंदा विश्वविद्यालय एक सपना साकार होने जैसा है।

पर्यावरण असंतुलन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुखर्जी ने कहा, “धरती हमारे लिए बहुत कुछ करती है और आज हम धरती के लिए क्या कर रहे हैं, यह सभी को सोचना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की योजना खुद बिजली पैदा करने की है, यह प्रणाली अन्य शिक्षण संस्थानों को भी लागू करनी चाहिए।

मुखर्जी इससे पहले पटना से विशेष हेलीकॉप्टर के जरिए राजगीर पहुंचे। राष्ट्रपति का स्वागत विश्वविद्यालय के कुलपति जॉर्ज यीओ और उप कुलपति गोपा सबरवाल ने किया।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने संयुक्त रूप से नालंदा विश्वविद्यालय के भवन की आधारशिला रखी।

समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वर्ष 2006 में नए नालंदा विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई थी। इस विश्वविद्यालय को बिहार सरकार पूरी मदद कर रही है और भविष्य में भी करेगी।

उन्होंने कहा, “बिहार सरकार ने विश्वविद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध करा दी है और हम चाहते हैं कि यह जल्द से जल्द अपने भवन में शिफ्ट हो जाए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि नालंदा को विश्व धरोहर में शामिल किया जाना गौरव की बात है। अब तेल्हाड़ा और विक्रमशिला को भी विकसित करने की जरूरत है।

इस मौके पर नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, डॉ़ मेघनाथ देसाई, राज्यपाल रामनाथ कोविंद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित राज्य के कई मंत्री और गणमान्य लोग उपस्थित थे।

नालंदा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में आठ देशों के प्रतिनिधिमंडल और राजदूत भी शामिल हुए।

उल्लेखनीय है कि इस विश्वविद्यालय में वर्ष 2014 में पढ़ाई प्रारंभ हुई थी। इस समय यह विश्वविद्यालय एक सरकारी भवन में चल रहा है। प्रारंभ में यहां इतिहास और पर्यावरण विज्ञान विषयों की पढ़ाई हो रही थी। वर्तमान सत्र में एक नया विषय बौद्ध अध्ययन, दर्शन और तुलनात्मक धर्मो की पढ़ाई शुरू की गई है।

नालंदा विश्वविद्यालय के पहले सत्र में तीन देशों के 12 छात्र थे, जबकि वर्तमान सत्र में 13 से अधिक देशों के 130 छात्र-छात्राएं हैं।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493