उप्र चुनाव में अतिपिछड़े निभाएंगे अहम भूमिका : लौटन राम

उन्होंने कहा कि 65-70 विधान सभा क्षेत्रों में निर्णायक बिंद, राजभर, चौहान जाति को एक भी उम्मीदवार सपा ने नहीं बनाया है, जो इस समाज के साथ घोर सामाजिक व राजनीतिक अन्याय है। उत्तर प्रदेश की 71 विधान सभा क्षेत्रों में निषादवंशीय समाज के 70 हजार से अधिक मतदाता हैं। लेकिन सपा ने एक भी निषादवंशीय को कैबिनेट मंत्री या स्वतंत्र प्रभार का मंत्री नहीं बनाया है।

उन्होंने कहा कि विधान सभा चुनाव 2017 में अतिपिछड़े वर्ग की जातियां मांझी की भूमिका निभाएंगी। पूर्वाचल के कई जिलों में राजभर, बिंद, चौहान, निर्णायक की स्थिति में हैं परंतु सपा ने इन जातियों का एक भी उम्मीदवार खड़ा नहीं किया।

निषाद ने बताया कि गाजीपुर सदर, जमानिया, बांसडीह, अतरौलिया, पिपराइच, गोखपुर ग्रामीण, कैंपियरगंज, चौरी चौरा, फरेंदा, पनियरा, मेंहदावल, गोसाईगंज, कटेहरी, जयसिंहपुर, कादीपुर, शाहगंज, बदलापुर, ज्ञानपुर, हड़िया, छानबे, मझवॉ, चुनार, अयाह शाह, जहानाबाद, कालपी, हमीरपुर, तिंदवारी, बिंदकी, घाटमपुर, बिठुर, बांगरमऊ, उन्नाव सदर, सेवता, नानपारा, बलहा, निघासन, भिनगा, मेहदावल, बांसी, जलालाबाद, कटरा, बरखेड़ा, बिसलपुर, बिथरी चैनपुर, दातागंज, मीलक, औरैया, तिरवा, इटावा, शिकोहाबाद, फतेहाबाद, बाह, माट, चरथावल, कैराना, हसनपुर आदि सहित 71 विधान सभाओं में निषादवंशीय मतदाताओं की संख्या 70 हजार से अधिक है। परंतु कोई भी दल दर्जन भर सीटें भी इस समाज को नहीं देते। आगामी विधान सभा चुनाव में 20 से अधिक सीट देने वाले दल को निषाद समाज समर्थन देगा।

उन्होंने कहा कि सपा, बसपा, कांग्रेस आदि दल केवल अतिपिछड़ों को वोटर व प्रचारक बनाकर रखते हैं, लेकिन अब अतिपिछड़े वोटर व प्रचारक का काम न कर सामाजिक न्याय व सम्मान देने वाले दल का साथ देंगे तथा सामाजिक अन्याय व राजनीतिक उपेक्षा करने वाले सपा जैसे दलों को विधानसभा चुनाव-2017 में सबक सिखाने की तैयारी कर रहे हैं।

निषाद ने कहा कि अतिपिछड़ों व अत्यंत पिछड़ों की उत्तर प्रदेश में 38 प्रतिशत से अधिक आबादी होने के बाद भी यह समाज राजनीतिक उपेक्षा व सामाजिक अन्याय का शिकार हो रहा है।

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