रांची, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। झारखंड उन राज्यों की सूची में नीचे खिसक गया है, जिन्हें व्यापार के लिए अनुकूल माना जाता है और निवेशकों को लुभाते हैं। मंगलवार को एक बयान में कहा गया कि इस सूची में झारखंड पहले तीसरे स्थान पर था जो अब सातवें पर पहुंच गया है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रोमोशन विभाग (डीआईपीपी) ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि व्यापार के लिए सुविधा देने वाले राज्यों में झारखंड तीसरे स्थान से लुढ़ककर सातवें पर पहुंच गया है।
बयान में कहा गया है कि झारखंड श्रम अधिनियम को सशक्त बनाने वाले राज्यों में पहले स्थान पर था, अब यह खिसक कर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। यह राज्य अन्य मानदंडों स्वीकृति देने, लाइसेंस देने और फैक्टरी कानून 1948 के तहत शीर्ष पांच स्थानों में नहीं है।
राज्य एकल खिड़की के तहत सुधार और जरूरत पड़ने पर भूमि की उपलब्धता के मामले में झारखंड पांचवें स्थान पर और ऑनलाइन टैक्स रिटर्न फाइल करने के मामले में चौथे स्थान पर है।
झारखंड अगले वर्ष फरवरी में वैश्विक निवेशक सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। विपक्षी दल मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व वाली सरकार पर निवेशकों को लुभाने के लिए विभिन्न शहरों में रोड शो के आयोजन पर करोड़ों रुपये खर्च करने को जनता के पैसे को बर्बाद करने का आरोप लगा रहा है।
राज्य में दो भूमि कानूनों को बदलने और इसका विरोध करने पर मात्र दो माह के अंदर तीन पुलिस फायरिंग से भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ जनाक्रोश है। ऐसी स्थिति में यहां वैश्विक निवेशक सम्मेलन होने जा रहा है।
झारखंड कांग्रेस के महासचिव किशोर साहदेव ने आईएएनएस से कहा, अब दो वर्षो में वास्तविकता का खुलासा हो गया है। राज्य में एक पैसे का भी निवेश नहीं हुआ है। रघुवर दास सरकार बंदूक के बल पर जमीन अधिगृहीत करने की कोशिश की रही है।
उन्होंने कहा कि निवेशकों को मूख्र्र नहीं बनाया जा सकता। सरकार निवेश के अनुकूल माहौल बनाने में नाकाम रही है। निवेशक जब भूमि कानूनों को लेकर जनता के गुस्से को जानेंगे तो भाग जाएंगे।
छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट और संथाल परगना टेनेंसी एक्ट जैसे काश्तकारी कानूनों में बदलाव का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। इसका विरोध करने पर हजारीबाग जिले के बड़कागांव सहित तीन जगह पुलिस फायरिंग की घटना को लेकर लोगों में गुस्सा है। ग्रामीण भी राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) लिमिटेड के कोयला खनन को लेकर विरोध कर रहे हैं।
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