अमरकंटक (मध्यप्रदेश ), 11 दिसंबर (आईएएनएस)। नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के संकल्प के साथ उद्गमस्थल अमरकंटक से रविवार को ‘नमामि देवी नर्मदे’ सेवा यात्रा शुरू हो गई। यात्रा की शुरुआत साधु-संत, पर्यावरणविद, समाज के प्रतिनिधियों के साथ राजनीतिक हस्तियां की मौजूदगी में हुई।
नर्मदा सेवा यात्रा के शुरू होने से पहले नर्मदा नदी को प्रतीकात्मक रूप से चुनरी ओढ़ाई गई और कलश यात्रा निकली गई।
शुभारंभ कार्यक्रम में महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि, चिन्मयानंद स्वामी, बाबा कल्याण दास, देव प्रभाकर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह कार्यवाह भैया जी जोशी, स्टॉक होम वॉटर प्राइज से सम्मानित राजेंद्र सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने दीप प्रज्जवलित किया।
मुख्यमंत्री चौहान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों केा नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने के साथ नदी के दोनों ओर पौधरोपण का संकल्प दिलाया। इस मौके पर मुख्यमंत्री चौहान को नर्मदा यात्रा की ध्वजा सौंपी गई।
यात्रा के शुभारंभ से पहले मुख्यमंत्री चौहान ने नर्मदा के उदगम स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में मां नर्मदा की पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश के विकास एवं जनता की सुख समृद्धि एवं पर्यावरण संरक्षण की आकांक्षा के साथ मां नर्मदा को चुनरी चढ़ाई। नर्मदा मंदिर में वैदिक विधि-विधान के साथ एवं साधु-संतों के मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की।
इसके अलावा मुख्यमंत्री चौहान, साधु-संतों की अगुवाई में कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा मां नर्मदा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर रामघाट तक पहुंची। कलश यात्रा के आगे-आगे लोक संस्कृति से जुड़े कलाकारों एवं कलश के साथ महिलाएं चल रही थीं। नगरवासी पुष्प-वर्षा कर रहे थे। पवित्र नगरी अमरकंटक में धार्मिक उत्साह एवं उत्सुकता का वातावरण बना हुआ है।
इससे पहले मुख्यमंत्री चौहान ने रविवार सुबह नर्मदा सेवा यात्रा शुरू होने के पहले अमरकंटक स्थित विभिन्न आश्रमों का भ्रमण किया। उन्होंने संत महात्माओं से भेंट कर नर्मदा सेवा यात्रा के उद्देश्यों की जानकारी दी और उन्हें यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री चौहान ने आचार्य महामंडलेश्वर सुखदेवानंद से भेंट की। आचार्य ने यात्रा की सराहना करते हुए उन वृक्षों के पौधे लगाने का सुझाव दिया जो जल संरक्षण और संवर्धन में मदद करते हैं। इनमें पीपल, बरगद, चीकू, आम अर्जुन, झिरी, बकूल आदि के पौधे शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रजातियों के पौधे लगाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
चौहान मृत्युंजय आश्रम पहुंचकर महामंडलेश्वर हरिहरानंद से और कल्याण आश्रम में अन्य संत-महात्माओं से भेंट की। उन्होंने यहां पूजा-अर्चना की और संतों को यात्रा में शामिल होने का न्यौता दिया। इसी तरह अन्य आश्रमों और धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण किया।
मुख्यमंत्री ने अमरकंटक स्थित प्राचीन मंदिर समूहों का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक नगरी को सुंदर और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त किया जाए। नर्मदा सेवा यात्रा के संयोजक एवं जनअभियान परिषद के पदाधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
नर्मदा को प्रदूषणमुक्त बनाने और नदी के संरक्षण के लिए जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी के उद्गमस्थल अमरकंटक से 144 दिवसीय ‘नमामि देवी नर्मदे’ सेवा यात्रा का 11 दिसंबर को शुभारंभ मुख्यमंत्री करेंगे। यात्रा नर्मदा नदी के तट पर स्थित नगरों एवं कस्बों से होकर 16 जिलों से गुजरेगी।
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