भोपाल, 20 जनवरी (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के सरकारी और निजी चिकित्सालयों में दुर्घटना पीड़ितों के मददगारों से पूछताछ न करने संबंधी खास सूचना पटल लगाए जाएंगे। ये सूचना पटल हिंदी और अंग्रेजी भाषा में होंगे।
सर्वोच्च न्यायालय ने 10 मार्च, 2016 को घायलों के उपचार को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। साथ केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह इसका प्रचार-प्रसार करे, ताकि दुर्घटना के घायलों के उपचार के मददगारों को किसी तरह की परेशानी न हो।
सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का पालन करते हुए राज्य के स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा सभी सरकारी व निजी चिकित्सालयों को निर्देश दिए गए हैं कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति के उपचार के लिए अस्पताल लाने वाले बाइस्टेंडर (मूक दर्शक) या गुड सेमेरिटन (अच्छा नेक व्यक्ति) से पूछताछ न करें।
आधिकारिक तौर पर शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि घायल के मददगार से किसी तरह की पूछताछ न करने के सूचना पटल अस्पताल परिसर में लगाना होंगे।
स्वास्थ्य संचालनालय के निर्देशों के मुताबिक, यदि कोई बाइस्टेंडर या गुड सेमेरिटन जो घायल व्यक्ति के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए फोन कॉल करता है, तो उसे फोन पर या व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना नाम और व्यक्तिगत विवरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जाए।
संचालनालय ने सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति की चिकित्सकीय देखभाल न करने वाले चिकित्सकों को कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों पर भारतीय चिकित्सा परिषद् (व्यवसायिक आचार, शिष्टाचार और नैतिक) विनियम 2002 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। वहीं बाइस्टेंडर या गुड सेमेरिटन द्वारा घायल व्यक्ति का लिखित में ब्यौरा मांगने पर अस्पताल को देना होगा।
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