केशव चंद्र ने कहा कि वह तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, कोई प्रत्याशी नहीं। आयोग का वह सम्मान करते हैं और आचार संहिता उल्लंघन की तो वह सोच भी नहीं सकते। इस प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से वह भ्रष्ट चुनावी व्यवस्था को आईना दिखाना चाहते थे। उन्होंने आयोग से यह जानना चाहा कि क्या प्रतीकात्मक विरोध भी आचार संहिता उल्लंघन के दायरे में आता है?
केशव चंद्र ने कहा कि बीवीपी सत्ता के साथ-साथ व्यवस्था परिवर्तन की भी हिमायती है। पार्टी तीस दलों के बहुजन मोर्चा की प्रमुख घटक है, जो राजनीतिक सिस्टम में परिवर्तन व चुनाव सुधारों के लिए लक्ष्य प्राप्ति तक लड़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी को मोर्चे के गठबंधन में साठ सीटें मिलीं हैं जो पूर्वांचल की हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज भी गुंडे, दुष्कर्मी, जाति-धर्म की राजनीति करने वाले अराजक तत्व खुलेआम चुनाव लड़ रहे हैं और आचार संहिता की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आयोग को ऐसे तत्वों पर कार्रवाई करनी चाहिए तथा भ्रष्ट व्यवस्था का विरोध करने वाले लोगों का साथ देना चाहिए।
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