उमा ने अतिथि गृह में पत्रकारों से कहा, “मैंने मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात कर गंगा स्वच्छता और प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं को लेकर वार्ता की है। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे, गंगा स्वच्छता और सिंचाई परियोजनाओं के बारे में प्रस्तुतिकरण तैयार कराकर मंत्रालय को शीघ्र भेजा जाएगा, ताकि केंद्र सरकार राज्य में अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए राशि जारी कर सके।”
उन्होंने कहा कि प्रदेश में गंगा व उसकी सहायक नदियों- रामगंगा, काली व यमुना नदी की स्वच्छता और पुनरुद्धार को लेकर विशेष चर्चा हुई।
उमा ने बताया, “मुख्यमंत्री ने वार्ता के दौरान ही अधिकारियों को एक हफ्ते में प्रस्तुतिकरण तैयार करने के निर्देश दिए। मई के अंत तक केंद्र सरकार गंगा के घाटों के निर्माण व स्वच्छता अभियान और तेज करने के लिए 7000 करोड़ रुपये जारी कर देगी। इसमें से 1600 करोड़ रुपये गांवों से गुजरने वाली गंगा और शहरों से गुजरने वाली गंगा के तटों, घाटों और निर्मलीकरण के लिए खर्च किए जाएंगे।”
उन्होंने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि तैयार करने में समय लगता है, लेकिन 2018 तक गंगा को निर्मल बनाने का कार्य हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।
उमा ने बताया, “राज्य सरकार को सलाह दी गई है कि मध्यप्रदेश में जिस तरह सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त कर प्रदेश को कृषि उत्पादन में नंबर वन बना दिया, उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी किया जा सकता है। इसी तरह राजस्थान सरकार द्वारा राज्य के पुरानी बावड़ियों, कुओं व जलस्रोतों का पुनरुद्धार करने, महाराष्ट्र सरकार द्वारा मजबूत की गई स्प्रिंकल सिंचाई प्रणाली और तेलंगाना सरकार की छोटे जल संग्रहण निकायों को आपस में जोड़कर पेयजल व सिंचाई व्यवस्था अच्छी बनाने के प्रयोग की संभावना उत्तर प्रदेश में भी तलाशने की सलाह भी मैंने दी है।”
बुंदेलखंड में पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की किल्लत पर उमा ने कहा, “केंद्र सरकार ने पेयजल के लिए थैली खोल दी है। देश के किसी हिस्से में पेयजल की कमी नहीं होने दी जाएगी।”
गोमती रिवर फ्रंट में वित्तीय अनियमितता पर उन्होंने कहा, “इसमें तमाम अनियमितताओं की शिकायतें हैं। इस परियोजना में नदी के जल की सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया। अगर कुछ गड़बड़ है तो उसको उजागर किया जाना चाहिए। जब तक कमियां पहचानी नहीं जाएंगी, परियोजना को बेहतर नहीं बनाया जा सकता।”
उन्होंने कहा कि गोमती रिवर फ्रंट परियोजना को भाजपा सरकार आगे बढ़ाएगी। लेकिन, इसमें जो भी वित्तीय अनियमितता हुई है, उसकी जांच होनी चाहिए।
राममंदिर के मसले पर उमा ने कहा, “अयोध्या में राममंदिर का निर्माण किसी एक राज्य का मामला नहीं है, यह पूरे देश की आस्था का विषय है। अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण हमारा सपना है। राममंदिर के लिए हमें जेल जाना पड़े या फांसी पर चढ़ना पड़े, स्वीकार्य है।”
उन्होंने कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में है और न्यायालय ने भी माना है कि इसका समाधान न्यायालय से बाहर निकला जाना चाहिए। सभी पक्षों को मिल-बैठकर समाधान निकालना चाहिए।
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