भोपाल, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। अमूमन शिक्षण संस्थानों के दीक्षांत समारोहों में उपाधि हासिल करने वाले गाउन, हैट नजर आते हैं, मगर मंगलवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह का नजारा जुदा था। यहां पूरी तरह भारतीयता नजर आई, क्योंकि छात्र-छात्राएं भारतीय परिधान में थे।
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हिन्दी के प्रति कुंठित मानसिकता को बदलने की जरूरत बताई। उन्होंने आह्वान किया, “अंग्रेजी का ज्ञान श्रेष्ठता का प्रतीक है, इस गुलाम मानसिकता को समाप्त किया जाए। हिन्दी में काम करने पर गर्व की अनुभूति हो, ऐसा वातावरण बनाएं।”
मुख्यमंत्री चौहान द्वारा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में 126 विद्यार्थियों को विद्या निधि स्नातकोत्तर एवं स्नातक प्रतिष्ठा की उपाधि प्रदान की गई। इसके साथ ही 156 विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र, पत्रोपाधि एवं स्नातकोत्तर पत्रोपाधि दी गईं।
समारोह की खूबी यह थी कि उपाधि व पत्रोपाधि पाने वाले सभी छात्र कुर्ता-पाजामा, कुर्ता-धोती के साथ सिर पर पीले रंग का साफा बांधे थे तो गले में अंगवस्त्र। इसी तरह छात्राएं साड़ी, अंगवस्त्र और सिर पर साफा बांधे हुए थीं।
उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने समारोह को भारतीय परिधान में करवाने पर कुलपति की सराहना की और ऐलान किया कि आगामी सत्र से सभी विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह भारतीय परिधान में होंगे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरण शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के माध्यम से संस्कृति को पुर्नस्थापित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि हिन्दी खत्म होगी तो संस्कृति खत्म होगी। संस्कृति खत्म होगी तो देश नहीं बचेगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति मोहनलाल छीपा ने कहा, “चिकित्सा शिक्षा को छोड़कर सभी पाठ्यक्रम हिन्दी में पढ़ाए जा रहे हैं। पाठ्यक्रम स्व-रोजगार आधारित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को दीक्षा दिलाई।”
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