मप्र के मंत्री की संस्था ने 4 करोड़ रुपये हड़पे : कांग्रेस

भोपाल, 10 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के नागरिक आपूर्ति मंत्री ओम प्रकाश धुर्वे पर अपने गैर सरकारी संगठन के जरिए फर्जी बिलों से चार करोड़ रुपये हड़पने का कांग्रेस ने आरोप लगाया है। धुर्वे पर आरोप है कि उन्होंने जिन वाहनों को एंबुलेंस बताया, वे वास्तव में स्कूल बस व अग्निशामक गाड़ियां हैं।

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने बुधवार को एक बयान जारी कर दीनदयाल चलित अस्पताल घोटाले में मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे को तत्काल मंत्री पद से बर्खास्त कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

सिंह का आरोप है कि धुर्वे ने वर्ष 2008 से 2012 के बीच दीनदयाल चलित अस्पताल योजना में अपने एनजीओ गजानन शिक्षा एवं जन सेवा समिति के जरिए चार करोड़ रुपये का ठेका लिया था। इस योजना के तहत उन्हें शहडोल, उमरिया, मंडला, डिंडोरी जिले के 86 आदिवासी विकास खंडों में दीनदयाल चलित अस्पताल योजना की सुविधाएं उपलब्ध करानी थी, लेकिन धुर्वे ने ऐसा न करते हुए एम्बुलेंस के जो बिल लगाए हैं, वे घोटाले का प्रमाण देते हैं।

सिंह के मुताबिक, “उन्होंने जिन गाड़ियों को एंबुलेंस बताया है, उनके नंबर परिवहन अधिकारी के कार्यालय में सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल की बस, डिंडोरी नगरपालिका के दमकल वाहन के नाम पर दर्ज हैं। यानी फर्जी गाड़ियों के नंबर देकर मंत्री धुर्वे ने दीनदयाल चलित अस्पताल योजना की पूरी चार करोड़ रुपये की राशि हड़प ली।”

सिंह ने कहा, “यह एक गंभीर मामला है। एक तो धुर्वे को इस धोखाधड़ी के कारण गरीब आदिवासियों को चिकित्सा सुविधा नहीं मिली। दूसरा एक मंत्री अपनी ही सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रहा है। मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार में जीरो टालरेंस का दावा करते हैं, वहीं उनकी ही सरकार के मंत्री घोटाले के आरोपी हैं।”

सिंह ने आरोप लगाया कि तत्कालीन जिलाधिकारी चंद्रशेखर बोरकर और उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी आज तक धुर्वे के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है।

सिंह ने कहा, “इसके पूर्व भी धुर्वे बांधवगढ़ उपचुनाव में आचार संहिता के स्पष्ट उल्लंघन के मामले में पकड़े गए, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वैसे भी सरकार का नारा है -अपराधी भाजपा के तो सौ खून माफ ।”

उन्होंने कहा, “जब सरकार के ही एक मंत्री ने दीनदयाल चलित अस्पताल में इतना बड़ा घोटाला किया है तो इससे पता चलता है कि पूरे प्रदेश में इस योजना में कितना बड़ा घोटाला हुआ होगा।” उन्होंने कहा कि इस पूरी योजना के कार्यकाल 2006 से लेकर 2012 तक की अगर निष्पक्षता से जांच की जाए तो अरबों रुपयों का घोटाला सामने आएगा।

सिंह के आरोपों पर धुर्वे से संपर्क करने की कोशिश की गई, मगर वे उपलब्ध नहीं हुए।

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