प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने किसानों के संवेदनशील मामले को उठाते हुए काम रोको प्रस्ताव लाया। इस मामले में चर्चा की मांग की। लिहाजा प्रश्नकाल हंगामे के बीच नहीं हो सका। कुल 39 सदस्यों ने सदन में काम रोको प्रस्ताव रखा।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के तथ्यात्मक प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने पढ़कर सुनाया, जिसपर संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी ने सरकार की ओर से पक्ष रखा, लेकिन विपक्ष ने असंतुष्टि जाहिर करते हुए नारेबाजी की।
दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने के बाद शुरू हुई विधानसभा मानसून सत्र का पहला घंटा हंगामेदार रहा। विधानसभा की कार्यवाही में कांग्रेस विधायकों ने जमकर खलल डाला। किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की। आसंदी ने विपक्ष की तरफ से स्थगन की सूचना की बात कही।
विपक्ष की ओर से कहा गया कि प्रश्नकाल के बाद विपक्ष अपनी बात रख सकता है, लेकिन प्रश्नकाल से ही विपक्ष के तेवर उक्त संवेदनशील मामले में उग्र दिखे और चर्चा की मांग कराने पर अड़े रहे।
विघानसभा सत्र शुरू होते ही किसानों को श्रद्धाजंलि देने की मांग की गई। श्रद्धाजंलि के दौरान ही कांग्रेस के विधायक धनेंद्र साहू ने किसानों के मुद्दे को उठा दिया था। दिवंगतों को श्रद्धांजलि के बाद पांच मिनट बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई।
विधानसभा में विपक्ष ने किसानों के मुद्दे पर हंगामा करना शुरू कर दिया। बार-बार आसंदी से विपक्ष को आश्वासन दिया गया कि किसानों के मुद्दे पर विपक्ष को बात कहने का मौका दिया जाएगा। विपक्ष सुनने को तैयार नहीं हुआ। किसानों की समस्याओं और उनके आत्महत्या के आंकड़ों को गिनाते हुए हंगामा किया। लिहाजा सदन की कार्यवाही एक बार 10 मिनट और दूसरी बार पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
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